22 दिसंबर 2028 को बरेली का पंचांग

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2028, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2028 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (11:31 तक), नक्षत्र शतभिषा (14:13 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:00 पर और सूर्यास्त 17:21 पर है। राहुकाल 10:53 से 12:11 तक है।

दिन और रात
दिन 07:00 – 17:21
रात 07:01 तक
तिथि
षष्ठी, 11:31 तक
सप्तमी
नक्षत्र
शतभिषा, 14:13 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 11:31 तक
शुक्ल सप्तमी 13:58, 23 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 14:13 तक
पूर्वा भाद्रपद 17:07, 23 दिस॰ तक
योग
सिद्धि 02:24, 23 दिस॰ तक
व्यतीपातअशुभ 03:13, 24 दिस॰ तक
करण
तैतिल 11:31 तक
गर 00:43, 23 दिस॰ तक
वणिज 13:58, 23 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:00
सूर्यास्त
17:21
चंद्रोदय
11:02
चंद्रास्त
23:15
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 06:06
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
10:53 – 12:11
यमगंड
14:46 – 16:03
गुलिक काल
08:18 – 09:35

22 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:00 – 08:18सामान्य
लाभ08:18 – 09:35शुभ
अमृत09:35 – 10:53शुभ
काल10:53 – 12:11टालें
शुभ12:11 – 13:28शुभ
रोग13:28 – 14:46टालें
उद्वेग14:46 – 16:03टालें
चर16:03 – 17:21सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:21 – 19:03टालें
काल19:03 – 20:46टालें
लाभ20:46 – 22:28शुभ
उद्वेग22:28 – 00:11टालें
शुभ00:11 – 01:53शुभ
अमृत01:53 – 03:36शुभ
चर03:36 – 05:18सामान्य
रोग05:18 – 07:01टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0007:52दिन
बुध07:5208:44दिन
चंद्र08:4409:35दिन
शनि09:3510:27दिन
गुरु10:2711:19दिन
मंगल11:1912:11दिन
सूर्य12:1113:02दिन
शुक्र13:0213:54दिन
बुध13:5414:46दिन
चंद्र14:4615:37दिन
शनि15:3716:29दिन
गुरु16:2917:21दिन
मंगल17:2118:29रात
सूर्य18:2919:37रात
शुक्र19:3720:46रात
बुध20:4621:54रात
चंद्र21:5423:02रात
शनि23:0200:11रात
गुरु00:1101:19रात
मंगल01:1902:27रात
सूर्य02:2703:36रात
शुक्र03:3604:44रात
बुध04:4405:52रात
चंद्र05:5207:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2618° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।