1 नवंबर 2029 को बरेली का पंचांग

गुरुवार, 1 नवंबर 2029, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 1 नवंबर 2029 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (02:22, 2 नव॰ तक), नक्षत्र मघा (22:47 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:23 पर और सूर्यास्त 17:27 पर है। राहुकाल 13:18 से 14:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:23 – 17:27
रात 06:24 तक
तिथि
दशमी, 02:22 तक
एकादशी
नक्षत्र
मघा, 22:47 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 नवंबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण दशमी 02:22, 2 नव॰ तक
कृष्ण एकादशी 23:58, 2 नव॰ तक
नक्षत्र
मघा 22:47 तक
योग
शुक्ल 08:54 तक
ब्रह्म 06:15, 2 नव॰ तक
इंद्र 03:01, 3 नव॰ तक
करण
वणिज 15:18 तक
विष्टि (भद्रा) 02:22, 2 नव॰ तक
बव 13:15, 2 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:23
सूर्यास्त
17:27
चंद्रोदय
00:54
चंद्रास्त
13:52
दिनमान
11h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:40 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:17

अशुभ समय

राहुकाल
13:18 – 14:41
यमगंड
06:23 – 07:46
गुलिक काल
09:09 – 10:32

1 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:23 – 07:46शुभ
रोग07:46 – 09:09टालें
उद्वेग09:09 – 10:32टालें
चर10:32 – 11:55सामान्य
लाभ11:55 – 13:18शुभ
अमृत13:18 – 14:41शुभ
काल14:41 – 16:04टालें
शुभ16:04 – 17:27शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:27 – 19:04शुभ
चर19:04 – 20:41सामान्य
रोग20:41 – 22:18टालें
काल22:18 – 23:56टालें
लाभ23:56 – 01:33शुभ
उद्वेग01:33 – 03:10टालें
शुभ03:10 – 04:47शुभ
अमृत04:47 – 06:24शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:2307:19दिन
मंगल07:1908:14दिन
सूर्य08:1409:09दिन
शुक्र09:0910:05दिन
बुध10:0511:00दिन
चंद्र11:0011:55दिन
शनि11:5512:50दिन
गुरु12:5013:46दिन
मंगल13:4614:41दिन
सूर्य14:4115:36दिन
शुक्र15:3616:32दिन
बुध16:3217:27दिन
चंद्र17:2718:32रात
शनि18:3219:36रात
गुरु19:3620:41रात
मंगल20:4121:46रात
सूर्य21:4622:51रात
शुक्र22:5123:56रात
बुध23:5601:00रात
चंद्र01:0002:05रात
शनि02:0503:10रात
गुरु03:1004:15रात
मंगल04:1505:19रात
सूर्य05:1906:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2738° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।