11 जून 2027 को बेंगलुरु का पंचांग

शुक्रवार, 11 जून 2027, बेंगलुरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 11 जून 2027 को बेंगलुरु में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (03:45, 12 जून तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (17:27 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 10:42 से 12:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 18:45
रात 05:53 तक
तिथि
अष्टमी, 03:45 तक
नवमी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 17:27 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जून 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 03:45, 12 जून तक
शुक्ल नवमी 02:44, 13 जून तक
नक्षत्र
योग
वज्रअशुभ 12:55 तक
सिद्धि 10:48, 12 जून तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:26 तक
बव 03:45, 12 जून तक
बालव 15:11, 12 जून तक
चंद्र राशि
सिंह 23:18 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
12:11
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
10:42 – 12:19
यमगंड
15:32 – 17:08
गुलिक काल
07:29 – 09:06

11 जून 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:52 – 07:29सामान्य
लाभ07:29 – 09:06शुभ
अमृत09:06 – 10:42शुभ
काल10:42 – 12:19टालें
शुभ12:19 – 13:55शुभ
रोग13:55 – 15:32टालें
उद्वेग15:32 – 17:08टालें
चर17:08 – 18:45सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:45 – 20:08टालें
काल20:08 – 21:32टालें
लाभ21:32 – 22:55शुभ
उद्वेग22:55 – 00:19टालें
शुभ00:19 – 01:42शुभ
अमृत01:42 – 03:06शुभ
चर03:06 – 04:29सामान्य
रोग04:29 – 05:53टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5206:57दिन
बुध06:5708:01दिन
चंद्र08:0109:06दिन
शनि09:0610:10दिन
गुरु10:1011:14दिन
मंगल11:1412:19दिन
सूर्य12:1913:23दिन
शुक्र13:2314:28दिन
बुध14:2815:32दिन
चंद्र15:3216:36दिन
शनि16:3617:41दिन
गुरु17:4118:45दिन
मंगल18:4519:41रात
सूर्य19:4120:36रात
शुक्र20:3621:32रात
बुध21:3222:28रात
चंद्र22:2823:23रात
शनि23:2300:19रात
गुरु00:1901:14रात
मंगल01:1402:10रात
सूर्य02:1003:06रात
शुक्र03:0604:01रात
बुध04:0104:57रात
चंद्र04:5705:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जून 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 जून 2027मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 जून 2027ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
23 जून 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जून 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जुल॰ 2027आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
7 जुल॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां बेंगलुरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2404° (लाहिड़ी)। समय बेंगलुरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।