26 जनवरी 2002 को चेन्नई का पंचांग

शनिवार, 26 जनवरी 2002, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 26 जनवरी 2002 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (11:59 तक), नक्षत्र मृगशिरा (12:43 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:07 पर है। राहुकाल 09:28 से 10:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:07
रात 06:35 तक
तिथि
द्वादशी, 11:59 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 12:43 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जनवरी 2002 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 11:59 तक
शुक्ल त्रयोदशी 10:00, 27 जन॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 11:24, 27 जन॰ तक
योग
इंद्र 09:03 तक
वैधृतिअशुभ 06:19, 27 जन॰ तक
विष्कंभअशुभ 03:04, 28 जन॰ तक
करण
बालव 11:59 तक
कौलव 23:05 तक
तैतिल 10:00, 27 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:07
चंद्रोदय
15:33
चंद्रास्त
03:51
दिनमान
11h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
09:28 – 10:55
यमगंड
13:47 – 15:14
गुलिक काल
06:35 – 08:02

26 जनवरी 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:35 – 08:02टालें
शुभ08:02 – 09:28शुभ
रोग09:28 – 10:55टालें
उद्वेग10:55 – 12:21टालें
चर12:21 – 13:47सामान्य
लाभ13:47 – 15:14शुभ
अमृत15:14 – 16:40शुभ
काल16:40 – 18:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:07 – 19:40शुभ
उद्वेग19:40 – 21:14टालें
शुभ21:14 – 22:47शुभ
अमृत22:47 – 00:21शुभ
चर00:21 – 01:55सामान्य
रोग01:55 – 03:28टालें
काल03:28 – 05:02टालें
लाभ05:02 – 06:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3507:33दिन
गुरु07:3308:31दिन
मंगल08:3109:28दिन
सूर्य09:2810:26दिन
शुक्र10:2611:23दिन
बुध11:2312:21दिन
चंद्र12:2113:19दिन
शनि13:1914:16दिन
गुरु14:1615:14दिन
मंगल15:1416:11दिन
सूर्य16:1117:09दिन
शुक्र17:0918:07दिन
बुध18:0719:09रात
चंद्र19:0920:11रात
शनि20:1121:14रात
गुरु21:1422:16रात
मंगल22:1623:19रात
सूर्य23:1900:21रात
शुक्र00:2101:23रात
बुध01:2302:26रात
चंद्र02:2603:28रात
शनि03:2804:31रात
गुरु04:3105:33रात
मंगल05:3306:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 जन॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 जन॰ 2002पौष पूर्णिमापूर्णिमा
1 फ़र॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 फ़र॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 फ़र॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 फ़र॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2002माघ अमावस्याअमावस्या
13 फ़र॰ 2002कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
23 फ़र॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8859° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।