30 दिसंबर 2003 को चेन्नई का पंचांग

मंगलवार, 30 दिसंबर 2003, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 30 दिसंबर 2003 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (04:19, 31 दिस॰ तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (20:01 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:30 पर और सूर्यास्त 17:52 पर है। राहुकाल 15:01 से 16:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:30 – 17:52
रात 06:30 तक
तिथि
अष्टमी, 04:19 तक
नवमी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 20:01 तक
रेवती
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 दिसंबर 2003 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 04:19, 31 दिस॰ तक
शुक्ल नवमी 06:21, 1 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 22:19, 31 दिस॰ तक
योग
वरीयान 17:48 तक
परिघअशुभ 18:01, 31 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:33 तक
बव 04:19, 31 दिस॰ तक
बालव 17:16, 31 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:30
सूर्यास्त
17:52
चंद्रोदय
12:06
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:39
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
15:01 – 16:26
यमगंड
09:20 – 10:45
गुलिक काल
12:11 – 13:36

30 दिसंबर 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:30 – 07:55टालें
उद्वेग07:55 – 09:20टालें
चर09:20 – 10:45सामान्य
लाभ10:45 – 12:11शुभ
अमृत12:11 – 13:36शुभ
काल13:36 – 15:01टालें
शुभ15:01 – 16:26शुभ
रोग16:26 – 17:52टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:52 – 19:26टालें
लाभ19:26 – 21:01शुभ
उद्वेग21:01 – 22:36टालें
शुभ22:36 – 00:11शुभ
अमृत00:11 – 01:46शुभ
चर01:46 – 03:20सामान्य
रोग03:20 – 04:55टालें
काल04:55 – 06:30टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3007:26दिन
सूर्य07:2608:23दिन
शुक्र08:2309:20दिन
बुध09:2010:17दिन
चंद्र10:1711:14दिन
शनि11:1412:11दिन
गुरु12:1113:08दिन
मंगल13:0814:04दिन
सूर्य14:0415:01दिन
शुक्र15:0115:58दिन
बुध15:5816:55दिन
चंद्र16:5517:52दिन
शनि17:5218:55रात
गुरु18:5519:58रात
मंगल19:5821:01रात
सूर्य21:0122:04रात
शुक्र22:0423:08रात
बुध23:0800:11रात
चंद्र00:1101:14रात
शनि01:1402:17रात
गुरु02:1703:20रात
मंगल03:2004:24रात
सूर्य04:2405:27रात
शुक्र05:2706:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जन॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जन॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जन॰ 2004पौष पूर्णिमापूर्णिमा
11 जन॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 जन॰ 2004मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2004कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
18 जन॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जन॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 जन॰ 2004माघ अमावस्याअमावस्या
25 जन॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9128° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।