12 जनवरी 2005 को चेन्नई का पंचांग

बुधवार, 12 जनवरी 2005, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 12 जनवरी 2005 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (09:55 तक), नक्षत्र श्रवण (11:49 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 12:17 से 13:42 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 17:59
रात 06:34 तक
तिथि
द्वितीया, 09:55 तक
तृतीया
नक्षत्र
श्रवण, 11:49 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 जनवरी 2005 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 09:55 तक
शुक्ल तृतीया 06:37, 13 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 11:49 तक
धनिष्ठा 09:18, 13 जन॰ तक
योग
वज्रअशुभ 09:30 तक
सिद्धि 05:32, 13 जन॰ तक
व्यतीपातअशुभ 02:02, 14 जन॰ तक
करण
कौलव 09:55 तक
तैतिल 20:12 तक
गर 06:37, 13 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 22:29 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
08:19
चंद्रास्त
20:07
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2061
शक संवत
1926, तारण संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:44
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:40 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:17 – 13:42
यमगंड
08:00 – 09:25
गुलिक काल
10:51 – 12:17

12 जनवरी 2005 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:34 – 08:00शुभ
अमृत08:00 – 09:25शुभ
काल09:25 – 10:51टालें
शुभ10:51 – 12:17शुभ
रोग12:17 – 13:42टालें
उद्वेग13:42 – 15:08टालें
चर15:08 – 16:34सामान्य
लाभ16:34 – 17:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:59 – 19:34टालें
शुभ19:34 – 21:08शुभ
अमृत21:08 – 22:43शुभ
चर22:43 – 00:17सामान्य
रोग00:17 – 01:51टालें
काल01:51 – 03:26टालें
लाभ03:26 – 05:00शुभ
उद्वेग05:00 – 06:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3407:31दिन
चंद्र07:3108:28दिन
शनि08:2809:25दिन
गुरु09:2510:23दिन
मंगल10:2311:20दिन
सूर्य11:2012:17दिन
शुक्र12:1713:14दिन
बुध13:1414:11दिन
चंद्र14:1115:08दिन
शनि15:0816:05दिन
गुरु16:0517:02दिन
मंगल17:0217:59दिन
सूर्य17:5919:02रात
शुक्र19:0220:05रात
बुध20:0521:08रात
चंद्र21:0822:11रात
शनि22:1123:14रात
गुरु23:1400:17रात
मंगल00:1701:20रात
सूर्य01:2002:23रात
शुक्र02:2303:26रात
बुध03:2604:29रात
चंद्र04:2905:31रात
शनि05:3106:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 जन॰ 2005विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2005मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
20 जन॰ 2005शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जन॰ 2005प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जन॰ 2005पौष पूर्णिमापूर्णिमा
29 जन॰ 2005संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 फ़र॰ 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 फ़र॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 फ़र॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 फ़र॰ 2005माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9273° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।