5 जनवरी 2009 को चेन्नई का पंचांग

सोमवार, 5 जनवरी 2009, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 5 जनवरी 2009 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (03:41, 6 जन॰ तक), नक्षत्र रेवती (10:44 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 17:55 पर है। राहुकाल 07:58 से 09:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 17:55
रात 06:33 तक
तिथि
नवमी, 03:41 तक
दशमी
नक्षत्र
रेवती, 10:44 तक
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2009 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल नवमी 03:41, 6 जन॰ तक
शुक्ल दशमी 01:38, 7 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 10:44 तक
अश्विनी 09:51, 6 जन॰ तक
योग
शिव 19:57 तक
सिद्ध 17:16, 6 जन॰ तक
करण
बालव 16:27 तक
कौलव 03:41, 6 जन॰ तक
तैतिल 14:44, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 10:44 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
12:20
चंद्रास्त
00:20
दिनमान
11h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2065
शक संवत
1930, सर्वधारी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:51 – 05:42
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
07:58 – 09:23
यमगंड
10:48 – 12:14
गुलिक काल
13:39 – 15:05

5 जनवरी 2009 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:32 – 07:58शुभ
काल07:58 – 09:23टालें
शुभ09:23 – 10:48शुभ
रोग10:48 – 12:14टालें
उद्वेग12:14 – 13:39टालें
चर13:39 – 15:05सामान्य
लाभ15:05 – 16:30शुभ
अमृत16:30 – 17:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:55 – 19:30सामान्य
रोग19:30 – 21:05टालें
काल21:05 – 22:39टालें
लाभ22:39 – 00:14शुभ
उद्वेग00:14 – 01:49टालें
शुभ01:49 – 03:23शुभ
अमृत03:23 – 04:58शुभ
चर04:58 – 06:33सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3207:29दिन
शनि07:2908:26दिन
गुरु08:2609:23दिन
मंगल09:2310:20दिन
सूर्य10:2011:17दिन
शुक्र11:1712:14दिन
बुध12:1413:11दिन
चंद्र13:1114:08दिन
शनि14:0815:05दिन
गुरु15:0516:02दिन
मंगल16:0216:59दिन
सूर्य16:5917:55दिन
शुक्र17:5518:59रात
बुध18:5920:02रात
चंद्र20:0221:05रात
शनि21:0522:08रात
गुरु22:0823:11रात
मंगल23:1100:14रात
सूर्य00:1401:17रात
शुक्र01:1702:20रात
बुध02:2003:23रात
चंद्र03:2304:26रात
शनि04:2605:29रात
गुरु05:2906:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 जन॰ 2009शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 जन॰ 2009प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 जन॰ 2009पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2009संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 जन॰ 2009मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2009कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जन॰ 2009कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 जन॰ 2009प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2009माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2009विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9829° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।