2 जनवरी 2011 को चेन्नई का पंचांग

रविवार, 2 जनवरी 2011, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 2 जनवरी 2011 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (14:27 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (02:09, 3 जन॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:31 पर और सूर्यास्त 17:53 पर है। राहुकाल 16:28 से 17:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:31 – 17:53
रात 06:31 तक
तिथि
त्रयोदशी, 14:27 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 02:09 तक
मूल
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जनवरी 2011 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 14:27 तक
कृष्ण चतुर्दशी 14:16, 3 जन॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 02:09, 3 जन॰ तक
मूल 02:45, 4 जन॰ तक
योग
गंडअशुभ 18:06 तक
वृद्धि 16:47, 3 जन॰ तक
करण
वणिज 14:27 तक
विष्टि (भद्रा) 02:19, 3 जन॰ तक
शकुनि 14:16, 3 जन॰ तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 02:09, 3 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:31
सूर्यास्त
17:53
चंद्रोदय
04:29
चंद्रास्त
16:06
दिनमान
11h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2067
शक संवत
1932, विकृति संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:40
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:35

अशुभ समय

राहुकाल
16:28 – 17:53
यमगंड
12:12 – 13:38
गुलिक काल
15:03 – 16:28

2 जनवरी 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:31 – 07:56टालें
चर07:56 – 09:22सामान्य
लाभ09:22 – 10:47शुभ
अमृत10:47 – 12:12शुभ
काल12:12 – 13:38टालें
शुभ13:38 – 15:03शुभ
रोग15:03 – 16:28टालें
उद्वेग16:28 – 17:53टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:53 – 19:28शुभ
अमृत19:28 – 21:03शुभ
चर21:03 – 22:38सामान्य
रोग22:38 – 00:12टालें
काल00:12 – 01:47टालें
लाभ01:47 – 03:22शुभ
उद्वेग03:22 – 04:57टालें
शुभ04:57 – 06:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3107:28दिन
शुक्र07:2808:25दिन
बुध08:2509:22दिन
चंद्र09:2210:18दिन
शनि10:1811:15दिन
गुरु11:1512:12दिन
मंगल12:1213:09दिन
सूर्य13:0914:06दिन
शुक्र14:0615:03दिन
बुध15:0316:00दिन
चंद्र16:0016:57दिन
शनि16:5717:53दिन
गुरु17:5318:57रात
मंगल18:5720:00रात
सूर्य20:0021:03रात
शुक्र21:0322:06रात
बुध22:0623:09रात
चंद्र23:0900:12रात
शनि00:1201:16रात
गुरु01:1602:19रात
मंगल02:1903:22रात
सूर्य03:2204:25रात
शुक्र04:2505:28रात
बुध05:2806:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 जन॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2011पौष अमावस्याअमावस्या
8 जन॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2011मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 जन॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2011पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 जन॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जन॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0107° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।