17 जनवरी 2011 को चेन्नई का पंचांग

सोमवार, 17 जनवरी 2011, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 17 जनवरी 2011 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (08:29 तक), नक्षत्र मृगशिरा (02:10, 18 जन॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 08:01 से 09:27 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:02
रात 06:35 तक
तिथि
त्रयोदशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 02:10 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जनवरी 2011 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 08:29 तक
शुक्ल त्रयोदशी 07:13, 18 जन॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 02:10, 18 जन॰ तक
आर्द्रा 01:02, 19 जन॰ तक
योग
ब्रह्म 15:14 तक
इंद्र 12:50, 18 जन॰ तक
करण
बालव 08:29 तक
कौलव 19:56 तक
तैतिल 07:13, 18 जन॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 14:29 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
15:36
चंद्रास्त
03:55
दिनमान
11h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2067
शक संवत
1932, विकृति संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
08:01 – 09:27
यमगंड
10:53 – 12:18
गुलिक काल
13:44 – 15:10

17 जनवरी 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:35 – 08:01शुभ
काल08:01 – 09:27टालें
शुभ09:27 – 10:53शुभ
रोग10:53 – 12:18टालें
उद्वेग12:18 – 13:44टालें
चर13:44 – 15:10सामान्य
लाभ15:10 – 16:36शुभ
अमृत16:36 – 18:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:02 – 19:36सामान्य
रोग19:36 – 21:10टालें
काल21:10 – 22:44टालें
लाभ22:44 – 00:18शुभ
उद्वेग00:18 – 01:53टालें
शुभ01:53 – 03:27शुभ
अमृत03:27 – 05:01शुभ
चर05:01 – 06:35सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3507:32दिन
शनि07:3208:29दिन
गुरु08:2909:27दिन
मंगल09:2710:24दिन
सूर्य10:2411:21दिन
शुक्र11:2112:18दिन
बुध12:1813:16दिन
चंद्र13:1614:13दिन
शनि14:1315:10दिन
गुरु15:1016:07दिन
मंगल16:0717:05दिन
सूर्य17:0518:02दिन
शुक्र18:0219:05रात
बुध19:0520:07रात
चंद्र20:0721:10रात
शनि21:1022:13रात
गुरु22:1323:16रात
मंगल23:1600:18रात
सूर्य00:1801:21रात
शुक्र01:2102:24रात
बुध02:2403:27रात
चंद्र03:2704:29रात
शनि04:2905:32रात
गुरु05:3206:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 जन॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2011पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 जन॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जन॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2011माघ अमावस्याअमावस्या
7 फ़र॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2011कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0113° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।