31 जनवरी 2013 को चेन्नई का पंचांग

गुरुवार, 31 जनवरी 2013, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 31 जनवरी 2013 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (11:12 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (19:23 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:09 पर है। राहुकाल 13:49 से 15:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:09
रात 06:35 तक
तिथि
चतुर्थी, 11:12 तक
पंचमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 19:23 तक
हस्त
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 जनवरी 2013 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 11:12 तक
कृष्ण पंचमी 10:33, 1 फ़र॰ तक
नक्षत्र
हस्त 19:14, 1 फ़र॰ तक
योग
सुकर्मा 04:36, 1 फ़र॰ तक
धृति 02:41, 2 फ़र॰ तक
करण
बालव 11:12 तक
कौलव 22:55 तक
तैतिल 10:33, 1 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:09
चंद्रोदय
21:44
चंद्रास्त
09:11
दिनमान
11h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
13:49 – 15:15
यमगंड
06:35 – 08:02
गुलिक काल
09:28 – 10:55

31 जनवरी 2013 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:35 – 08:02शुभ
रोग08:02 – 09:28टालें
उद्वेग09:28 – 10:55टालें
चर10:55 – 12:22सामान्य
लाभ12:22 – 13:49शुभ
अमृत13:49 – 15:15शुभ
काल15:15 – 16:42टालें
शुभ16:42 – 18:09शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:09 – 19:42शुभ
चर19:42 – 21:15सामान्य
रोग21:15 – 22:49टालें
काल22:49 – 00:22टालें
लाभ00:22 – 01:55शुभ
उद्वेग01:55 – 03:28टालें
शुभ03:28 – 05:02शुभ
अमृत05:02 – 06:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3507:33दिन
मंगल07:3308:31दिन
सूर्य08:3109:28दिन
शुक्र09:2810:26दिन
बुध10:2611:24दिन
चंद्र11:2412:22दिन
शनि12:2213:20दिन
गुरु13:2014:18दिन
मंगल14:1815:15दिन
सूर्य15:1516:13दिन
शुक्र16:1317:11दिन
बुध17:1118:09दिन
चंद्र18:0919:11रात
शनि19:1120:13रात
गुरु20:1321:15रात
मंगल21:1522:18रात
सूर्य22:1823:20रात
शुक्र23:2000:22रात
बुध00:2201:24रात
चंद्र01:2402:26रात
शनि02:2603:28रात
गुरु03:2804:30रात
मंगल04:3005:33रात
सूर्य05:3306:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 जन॰ 2013संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 फ़र॰ 2013कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 फ़र॰ 2013कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 फ़र॰ 2013प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2013माघ अमावस्याअमावस्या
12 फ़र॰ 2013कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2013विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
21 फ़र॰ 2013शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 फ़र॰ 2013प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2013माघ पूर्णिमापूर्णिमा
1 मार्च 2013संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0398° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।