11 जनवरी 2014 को चेन्नई का पंचांग

शनिवार, 11 जनवरी 2014, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 11 जनवरी 2014 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (00:50, 12 जन॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (01:57, 12 जन॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 09:25 से 10:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 17:59
रात 06:34 तक
तिथि
एकादशी, 00:50 तक
द्वादशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 01:57 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जनवरी 2014 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 00:50, 12 जन॰ तक
शुक्ल द्वादशी 02:59, 13 जन॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 01:57, 12 जन॰ तक
रोहिणी 04:33, 13 जन॰ तक
योग
शुभ 00:27, 12 जन॰ तक
शुक्ल 00:57, 13 जन॰ तक
करण
वणिज 11:54 तक
विष्टि (भद्रा) 00:50, 12 जन॰ तक
बव 13:52, 12 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
14:14
चंद्रास्त
02:23
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2070
शक संवत
1935, विजय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
09:25 – 10:51
यमगंड
13:42 – 15:08
गुलिक काल
06:34 – 07:59

11 जनवरी 2014 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:34 – 07:59टालें
शुभ07:59 – 09:25शुभ
रोग09:25 – 10:51टालें
उद्वेग10:51 – 12:16टालें
चर12:16 – 13:42सामान्य
लाभ13:42 – 15:08शुभ
अमृत15:08 – 16:33शुभ
काल16:33 – 17:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:59 – 19:33शुभ
उद्वेग19:33 – 21:08टालें
शुभ21:08 – 22:42शुभ
अमृत22:42 – 00:16शुभ
चर00:16 – 01:51सामान्य
रोग01:51 – 03:25टालें
काल03:25 – 05:00टालें
लाभ05:00 – 06:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3407:31दिन
गुरु07:3108:28दिन
मंगल08:2809:25दिन
सूर्य09:2510:22दिन
शुक्र10:2211:19दिन
बुध11:1912:16दिन
चंद्र12:1613:13दिन
शनि13:1314:10दिन
गुरु14:1015:08दिन
मंगल15:0816:05दिन
सूर्य16:0517:02दिन
शुक्र17:0217:59दिन
बुध17:5919:02रात
चंद्र19:0220:05रात
शनि20:0521:08रात
गुरु21:0822:11रात
मंगल22:1123:13रात
सूर्य23:1300:16रात
शुक्र00:1601:19रात
बुध01:1902:22रात
चंद्र02:2203:25रात
शनि03:2504:28रात
गुरु04:2805:31रात
मंगल05:3106:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 जन॰ 2014शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 जन॰ 2014प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2014मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2014पौष पूर्णिमापूर्णिमा
20 जन॰ 2014संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
24 जन॰ 2014कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
27 जन॰ 2014कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
29 जन॰ 2014प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 जन॰ 2014माघ अमावस्याअमावस्या
3 फ़र॰ 2014विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0530° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।