27 दिसंबर 2015 को चेन्नई का पंचांग

रविवार, 27 दिसंबर 2015, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 27 दिसंबर 2015 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (14:42 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (11:19 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:28 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 16:25 से 17:50 तक है।

दिन और रात
दिन 06:28 – 17:50
रात 06:29 तक
तिथि
द्वितीया, 14:42 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुनर्वसु, 11:19 तक
पुष्य
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 दिसंबर 2015 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 14:42 तक
कृष्ण तृतीया 14:42, 28 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 11:49, 28 दिस॰ तक
योग
इंद्र 15:09 तक
वैधृतिअशुभ 13:57, 28 दिस॰ तक
करण
गर 14:42 तक
वणिज 02:36, 28 दिस॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:42, 28 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:28
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
19:44
चंद्रास्त
07:49
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2072
शक संवत
1937, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:38
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
16:25 – 17:50
यमगंड
12:09 – 13:34
गुलिक काल
15:00 – 16:25

27 दिसंबर 2015 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:28 – 07:54टालें
चर07:54 – 09:19सामान्य
लाभ09:19 – 10:44शुभ
अमृत10:44 – 12:09शुभ
काल12:09 – 13:34टालें
शुभ13:34 – 15:00शुभ
रोग15:00 – 16:25टालें
उद्वेग16:25 – 17:50टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:50 – 19:25शुभ
अमृत19:25 – 21:00शुभ
चर21:00 – 22:35सामान्य
रोग22:35 – 00:09टालें
काल00:09 – 01:44टालें
लाभ01:44 – 03:19शुभ
उद्वेग03:19 – 04:54टालें
शुभ04:54 – 06:29शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2807:25दिन
शुक्र07:2508:22दिन
बुध08:2209:19दिन
चंद्र09:1910:16दिन
शनि10:1611:12दिन
गुरु11:1212:09दिन
मंगल12:0913:06दिन
सूर्य13:0614:03दिन
शुक्र14:0315:00दिन
बुध15:0015:56दिन
चंद्र15:5616:53दिन
शनि16:5317:50दिन
गुरु17:5018:53रात
मंगल18:5319:57रात
सूर्य19:5721:00रात
शुक्र21:0022:03रात
बुध22:0323:06रात
चंद्र23:0600:09रात
शनि00:0901:13रात
गुरु01:1302:16रात
मंगल02:1603:19रात
सूर्य03:1904:22रात
शुक्र04:2205:26रात
बुध05:2606:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 दिस॰ 2015संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 जन॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 जन॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 जन॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 जन॰ 2016पौष अमावस्याअमावस्या
13 जन॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 जन॰ 2016मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
20 जन॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 जन॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 जन॰ 2016पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0804° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।