पुष्य नक्षत्र

पुष्य को सबसे शुभ नक्षत्र माना जाता है। इसके स्वामी शनि और देवता बृहस्पति हैं। यह पोषण और रक्षा करता है तथा कर्तव्यनिष्ठ, समर्पित स्वभाव देता है।

विशेषताएं

  • पालन-पोषण करने वाले
  • अनुशासित
  • धार्मिक
  • परंपरावादी

अनुकूल करियर

  • शिक्षण और पुरोहिती
  • डेयरी और खाद्य
  • समाज सेवा
  • प्रशासन

पद (चरण)

पदराशिविस्तारनवांशनाम अक्षर
1कर्क3° 20′ 00″ – 6° 40′ 00″सिंहHu
2कर्क6° 40′ 00″ – 10° 00′ 00″कन्याHe
3कर्क10° 00′ 00″ – 13° 20′ 00″तुलाHo
4कर्क13° 20′ 00″ – 16° 40′ 00″वृश्चिकDa

पिछला: पुनर्वसु। अगला: आश्लेषा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन है?

शनि। जिनके जन्म के समय चंद्रमा पुष्य में होता है, उनका जीवन विंशोत्तरी पद्धति की शनि महादशा से शुरू होता है।

पुष्य के नाम अक्षर कौन-से हैं?

पुष्य के चार पद Hu, He, Ho, Da अक्षरों से जुड़े हैं। परंपरा के अनुसार बच्चे का नाम जन्म के समय चंद्रमा के पद के अक्षर से शुरू होता है।

पुष्य किस गण और नाड़ी का है?

पुष्य देव गण, मध्य नाड़ी और मेष (भेड़) योनि का है — ये कारक कुंडली मिलान में उपयोग होते हैं।