आश्लेषा नक्षत्र
आश्लेषा, कुंडली मारे सर्प, के स्वामी बुध और देवता नाग हैं। यह भेदक अंतर्दृष्टि, रणनीतिक सोच और चुंबकीय, कभी-कभी रहस्यमय स्वभाव देता है।
विशेषताएं
- पारखी
- रणनीतिक
- रहस्यमय
- प्रभावशाली वक्ता
अनुकूल करियर
- मनोविज्ञान
- राजनीति
- फ़ार्मेसी और रसायन
- गूढ़ विद्याओं का अध्ययन
पद (चरण)
| पद | राशि | विस्तार | नवांश | नाम अक्षर |
|---|
| 1 | कर्क | 16° 40′ 00″ – 20° 00′ 00″ | धनु | Di |
| 2 | कर्क | 20° 00′ 00″ – 23° 19′ 59″ | मकर | Du |
| 3 | कर्क | 23° 20′ 00″ – 26° 40′ 00″ | कुंभ | De |
| 4 | कर्क | 26° 40′ 00″ – 30° 00′ 00″ | मीन | Do |
पिछला: पुष्य। अगला: मघा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
बुध। जिनके जन्म के समय चंद्रमा आश्लेषा में होता है, उनका जीवन विंशोत्तरी पद्धति की बुध महादशा से शुरू होता है।
आश्लेषा के नाम अक्षर कौन-से हैं?
आश्लेषा के चार पद Di, Du, De, Do अक्षरों से जुड़े हैं। परंपरा के अनुसार बच्चे का नाम जन्म के समय चंद्रमा के पद के अक्षर से शुरू होता है।
आश्लेषा किस गण और नाड़ी का है?
आश्लेषा राक्षस गण, अंत्य नाड़ी और मार्जार योनि का है — ये कारक कुंडली मिलान में उपयोग होते हैं।