10 जुलाई 2026 को चेन्नई का पंचांग

शुक्रवार, 10 जुलाई 2026, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (08:16 तक), नक्षत्र भरणी (13:15 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है। राहुकाल 10:37 से 12:14 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 18:39
रात 05:49 तक
तिथि
एकादशी, 05:23 तक
नक्षत्र
भरणी, 13:15 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 जुलाई 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण दशमी 08:16 तक
कृष्ण एकादशी 05:23, 11 जुल॰ तक
कृष्ण द्वादशी 02:04, 12 जुल॰ तक
नक्षत्र
भरणी 13:15 तक
कृत्तिका 11:03, 11 जुल॰ तक
योग
धृति 07:14 तक
शूलअशुभ 03:50, 11 जुल॰ तक
गंडअशुभ 00:05, 12 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:16 तक
बव 18:53 तक
बालव 05:23, 11 जुल॰ तक
कौलव 15:46, 11 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मेष 18:45 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
01:17
चंद्रास्त
14:28
दिनमान
12h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
10:37 – 12:14
यमगंड
15:27 – 17:03
गुलिक काल
07:25 – 09:01

10 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:48 – 07:25सामान्य
लाभ07:25 – 09:01शुभ
अमृत09:01 – 10:37शुभ
काल10:37 – 12:14टालें
शुभ12:14 – 13:50शुभ
रोग13:50 – 15:27टालें
उद्वेग15:27 – 17:03टालें
चर17:03 – 18:39सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:39 – 20:03टालें
काल20:03 – 21:27टालें
लाभ21:27 – 22:50शुभ
उद्वेग22:50 – 00:14टालें
शुभ00:14 – 01:38शुभ
अमृत01:38 – 03:01शुभ
चर03:01 – 04:25सामान्य
रोग04:25 – 05:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4806:52दिन
बुध06:5207:57दिन
चंद्र07:5709:01दिन
शनि09:0110:05दिन
गुरु10:0511:09दिन
मंगल11:0912:14दिन
सूर्य12:1413:18दिन
शुक्र13:1814:22दिन
बुध14:2215:27दिन
चंद्र15:2716:31दिन
शनि16:3117:35दिन
गुरु17:3518:39दिन
मंगल18:3919:35रात
सूर्य19:3520:31रात
शुक्र20:3121:27रात
बुध21:2722:22रात
चंद्र22:2223:18रात
शनि23:1800:14रात
गुरु00:1401:10रात
मंगल01:1002:05रात
सूर्य02:0503:01रात
शुक्र03:0103:57रात
बुध03:5704:53रात
चंद्र04:5305:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
16 जुल॰ 2026कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2275° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।