3 जून 2027 को चेन्नई का पंचांग

गुरुवार, 3 जून 2027, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 3 जून 2027 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (06:35 तक), नक्षत्र भरणी (11:02 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 13:43 से 15:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 18:32
रात 05:41 तक
तिथि
चतुर्दशी, 04:05 तक
अमावस्या
नक्षत्र
भरणी, 11:02 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 जून 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 06:35 तक
कृष्ण चतुर्दशी 04:05, 4 जून तक
अमावस्या 01:10, 5 जून तक
नक्षत्र
भरणी 11:02 तक
कृत्तिका 09:14, 4 जून तक
योग
अतिगंडअशुभ 19:05 तक
सुकर्मा 15:46, 4 जून तक
करण
वणिज 06:35 तक
विष्टि (भद्रा) 17:24 तक
शकुनि 04:05, 4 जून तक
चतुष्पद 14:40, 4 जून तक
चंद्र राशि
मेष 16:37 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
03:54
चंद्रास्त
17:08
दिनमान
12h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
13:43 – 15:19
यमगंड
05:41 – 07:17
गुलिक काल
08:54 – 10:30

3 जून 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:41 – 07:17शुभ
रोग07:17 – 08:54टालें
उद्वेग08:54 – 10:30टालें
चर10:30 – 12:07सामान्य
लाभ12:07 – 13:43शुभ
अमृत13:43 – 15:19शुभ
काल15:19 – 16:56टालें
शुभ16:56 – 18:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:32 – 19:56शुभ
चर19:56 – 21:19सामान्य
रोग21:19 – 22:43टालें
काल22:43 – 00:07टालें
लाभ00:07 – 01:30शुभ
उद्वेग01:30 – 02:54टालें
शुभ02:54 – 04:17शुभ
अमृत04:17 – 05:41शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4106:45दिन
मंगल06:4507:49दिन
सूर्य07:4908:54दिन
शुक्र08:5409:58दिन
बुध09:5811:02दिन
चंद्र11:0212:07दिन
शनि12:0713:11दिन
गुरु13:1114:15दिन
मंगल14:1515:19दिन
सूर्य15:1916:24दिन
शुक्र16:2417:28दिन
बुध17:2818:32दिन
चंद्र18:3219:28रात
शनि19:2820:24रात
गुरु20:2421:19रात
मंगल21:1922:15रात
सूर्य22:1523:11रात
शुक्र23:1100:07रात
बुध00:0701:02रात
चंद्र01:0201:58रात
शनि01:5802:54रात
गुरु02:5403:50रात
मंगल03:5004:45रात
सूर्य04:4505:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जून 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जून 2027ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
8 जून 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जून 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 जून 2027मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 जून 2027ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
23 जून 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जून 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2401° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।