7 जुलाई 2028 को चेन्नई का पंचांग

शुक्रवार, 7 जुलाई 2028, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 7 जुलाई 2028 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (00:46, 8 जुल॰ तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (10:42 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है। राहुकाल 10:37 से 12:13 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 18:39
रात 05:48 तक
तिथि
प्रतिपदा, 00:46 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 10:42 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 जुलाई 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 00:46, 8 जुल॰ तक
कृष्ण द्वितीया 02:20, 9 जुल॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 12:39, 8 जुल॰ तक
योग
इंद्र 08:16 तक
वैधृतिअशुभ 08:18, 8 जुल॰ तक
करण
बालव 12:10 तक
कौलव 00:46, 8 जुल॰ तक
तैतिल 13:30, 8 जुल॰ तक
चंद्र राशि
धनु 17:09 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
19:14
चंद्रास्त
06:04
दिनमान
12h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
10:37 – 12:13
यमगंड
15:26 – 17:03
गुलिक काल
07:24 – 09:00

7 जुलाई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:48 – 07:24सामान्य
लाभ07:24 – 09:00शुभ
अमृत09:00 – 10:37शुभ
काल10:37 – 12:13टालें
शुभ12:13 – 13:50शुभ
रोग13:50 – 15:26टालें
उद्वेग15:26 – 17:03टालें
चर17:03 – 18:39सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:39 – 20:03टालें
काल20:03 – 21:26टालें
लाभ21:26 – 22:50शुभ
उद्वेग22:50 – 00:14टालें
शुभ00:14 – 01:37शुभ
अमृत01:37 – 03:01शुभ
चर03:01 – 04:24सामान्य
रोग04:24 – 05:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4806:52दिन
बुध06:5207:56दिन
चंद्र07:5609:00दिन
शनि09:0010:05दिन
गुरु10:0511:09दिन
मंगल11:0912:13दिन
सूर्य12:1313:18दिन
शुक्र13:1814:22दिन
बुध14:2215:26दिन
चंद्र15:2616:31दिन
शनि16:3117:35दिन
गुरु17:3518:39दिन
मंगल18:3919:35रात
सूर्य19:3520:31रात
शुक्र20:3121:26रात
बुध21:2622:22रात
चंद्र22:2223:18रात
शनि23:1800:14रात
गुरु00:1401:09रात
मंगल01:0902:05रात
सूर्य02:0503:01रात
शुक्र03:0103:56रात
बुध03:5604:52रात
चंद्र04:5205:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जुल॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जुल॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 जुल॰ 2028कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जुल॰ 2028श्रावण अमावस्याअमावस्या
25 जुल॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 अग॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 अग॰ 2028श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2554° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।