10 अगस्त 2028 को चेन्नई का पंचांग

गुरुवार, 10 अगस्त 2028, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 10 अगस्त 2028 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (01:13, 11 अग॰ तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (09:37 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 13:48 से 15:23 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 18:32
रात 05:56 तक
तिथि
पंचमी, 01:13 तक
षष्ठी
नक्षत्र
रेवती
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अगस्त 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 01:13, 11 अग॰ तक
कृष्ण षष्ठी 03:12, 12 अग॰ तक
नक्षत्र
रेवती 12:22, 11 अग॰ तक
योग
धृति 21:09 तक
शूलअशुभ 21:49, 11 अग॰ तक
करण
कौलव 12:06 तक
तैतिल 01:13, 11 अग॰ तक
गर 14:15, 11 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
21:33
चंद्रास्त
09:32
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
13:48 – 15:23
यमगंड
05:56 – 07:30
गुलिक काल
09:05 – 10:39

10 अगस्त 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:56 – 07:30शुभ
रोग07:30 – 09:05टालें
उद्वेग09:05 – 10:39टालें
चर10:39 – 12:14सामान्य
लाभ12:14 – 13:48शुभ
अमृत13:48 – 15:23शुभ
काल15:23 – 16:57टालें
शुभ16:57 – 18:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:32 – 19:57शुभ
चर19:57 – 21:23सामान्य
रोग21:23 – 22:48टालें
काल22:48 – 00:14टालें
लाभ00:14 – 01:39शुभ
उद्वेग01:39 – 03:05टालें
शुभ03:05 – 04:30शुभ
अमृत04:30 – 05:56शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5606:59दिन
मंगल06:5908:02दिन
सूर्य08:0209:05दिन
शुक्र09:0510:08दिन
बुध10:0811:11दिन
चंद्र11:1112:14दिन
शनि12:1413:17दिन
गुरु13:1714:20दिन
मंगल14:2015:23दिन
सूर्य15:2316:26दिन
शुक्र16:2617:29दिन
बुध17:2918:32दिन
चंद्र18:3219:29रात
शनि19:2920:26रात
गुरु20:2621:23रात
मंगल21:2322:20रात
सूर्य22:2023:17रात
शुक्र23:1700:14रात
बुध00:1401:11रात
चंद्र01:1102:08रात
शनि02:0803:05रात
गुरु03:0504:02रात
मंगल04:0204:59रात
सूर्य04:5905:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अग॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अग॰ 2028भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
23 अग॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2567° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।