22 जनवरी 2048 को चेन्नई का पंचांग

बुधवार, 22 जनवरी 2048, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 22 जनवरी 2048 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (14:21 तक), नक्षत्र रेवती (11:27 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 12:20 से 13:46 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:04
रात 06:35 तक
तिथि
सप्तमी, 14:21 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रेवती, 11:27 तक
अश्विनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जनवरी 2048 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 14:21 तक
शुक्ल अष्टमी 16:37, 23 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 11:27 तक
अश्विनी 14:07, 23 जन॰ तक
योग
सिद्ध 16:19 तक
साध्य 16:57, 23 जन॰ तक
करण
वणिज 14:21 तक
विष्टि (भद्रा) 03:26, 23 जन॰ तक
बव 16:37, 23 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 11:27 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
11:13
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2104
शक संवत
1969, प्रभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:43 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:20 – 13:46
यमगंड
08:01 – 09:28
गुलिक काल
10:54 – 12:20

22 जनवरी 2048 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:35 – 08:01शुभ
अमृत08:01 – 09:28शुभ
काल09:28 – 10:54टालें
शुभ10:54 – 12:20शुभ
रोग12:20 – 13:46टालें
उद्वेग13:46 – 15:12टालें
चर15:12 – 16:38सामान्य
लाभ16:38 – 18:04शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:04 – 19:38टालें
शुभ19:38 – 21:12शुभ
अमृत21:12 – 22:46शुभ
चर22:46 – 00:20सामान्य
रोग00:20 – 01:54टालें
काल01:54 – 03:28टालें
लाभ03:28 – 05:01शुभ
उद्वेग05:01 – 06:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3507:33दिन
चंद्र07:3308:30दिन
शनि08:3009:28दिन
गुरु09:2810:25दिन
मंगल10:2511:22दिन
सूर्य11:2212:20दिन
शुक्र12:2013:17दिन
बुध13:1714:15दिन
चंद्र14:1515:12दिन
शनि15:1216:10दिन
गुरु16:1017:07दिन
मंगल17:0718:04दिन
सूर्य18:0419:07रात
शुक्र19:0720:10रात
बुध20:1021:12रात
चंद्र21:1222:15रात
शनि22:1523:17रात
गुरु23:1700:20रात
मंगल00:2001:22रात
सूर्य01:2202:25रात
शुक्र02:2503:28रात
बुध03:2804:30रात
चंद्र04:3005:33रात
शनि05:3306:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जन॰ 2048शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2048प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2048माघ पूर्णिमापूर्णिमा
3 फ़र॰ 2048संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 फ़र॰ 2048कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 फ़र॰ 2048कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 फ़र॰ 2048प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2048फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
13 फ़र॰ 2048कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2048विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5284° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।