11 जनवरी 2065 को चेन्नई का पंचांग

रविवार, 11 जनवरी 2065, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 11 जनवरी 2065 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (01:13, 12 जन॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (10:49 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 16:33 से 17:59 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 17:59
रात 06:34 तक
तिथि
पंचमी, 01:13 तक
षष्ठी
नक्षत्र
शतभिषा, 10:49 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जनवरी 2065 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 01:13, 12 जन॰ तक
शुक्ल षष्ठी 03:12, 13 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 10:49 तक
पूर्वा भाद्रपद 12:58, 12 जन॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 10:38 तक
वरीयान 10:46, 12 जन॰ तक
करण
बव 12:26 तक
बालव 01:13, 12 जन॰ तक
कौलव 14:09, 12 जन॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 06:23, 12 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
09:44
चंद्रास्त
22:00
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2121
शक संवत
1986, तारण संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
16:33 – 17:59
यमगंड
12:16 – 13:42
गुलिक काल
15:08 – 16:33

11 जनवरी 2065 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:34 – 07:59टालें
चर07:59 – 09:25सामान्य
लाभ09:25 – 10:51शुभ
अमृत10:51 – 12:16शुभ
काल12:16 – 13:42टालें
शुभ13:42 – 15:08शुभ
रोग15:08 – 16:33टालें
उद्वेग16:33 – 17:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:59 – 19:33शुभ
अमृत19:33 – 21:08शुभ
चर21:08 – 22:42सामान्य
रोग22:42 – 00:17टालें
काल00:17 – 01:51टालें
लाभ01:51 – 03:25शुभ
उद्वेग03:25 – 05:00टालें
शुभ05:00 – 06:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3407:31दिन
शुक्र07:3108:28दिन
बुध08:2809:25दिन
चंद्र09:2510:22दिन
शनि10:2211:19दिन
गुरु11:1912:16दिन
मंगल12:1613:14दिन
सूर्य13:1414:11दिन
शुक्र14:1115:08दिन
बुध15:0816:05दिन
चंद्र16:0517:02दिन
शनि17:0217:59दिन
गुरु17:5919:02रात
मंगल19:0220:05रात
सूर्य20:0521:08रात
शुक्र21:0822:11रात
बुध22:1123:14रात
चंद्र23:1400:17रात
शनि00:1701:19रात
गुरु01:1902:22रात
मंगल02:2203:25रात
सूर्य03:2504:28रात
शुक्र04:2805:31रात
बुध05:3106:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जन॰ 2065मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2065शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2065प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2065पौष पूर्णिमापूर्णिमा
26 जन॰ 2065संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जन॰ 2065कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 फ़र॰ 2065कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 फ़र॰ 2065प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 फ़र॰ 2065माघ अमावस्याअमावस्या
9 फ़र॰ 2065विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7656° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।