16 जनवरी 2075 को चेन्नई का पंचांग

बुधवार, 16 जनवरी 2075, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 16 जनवरी 2075 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (00:07, 17 जन॰ तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (15:44 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:01 पर है। राहुकाल 12:18 से 13:44 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:01
रात 06:35 तक
तिथि
अमावस्या, 00:07 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 15:44 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 जनवरी 2075 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 00:07, 17 जन॰ तक
शुक्ल प्रतिपदा 21:10, 17 जन॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 13:24, 17 जन॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 08:28 तक
हर्षण 04:38, 17 जन॰ तक
वज्रअशुभ 01:04, 18 जन॰ तक
करण
चतुष्पद 13:42 तक
नाग 00:07, 17 जन॰ तक
किंस्तुघ्न 10:36, 17 जन॰ तक
चंद्र राशि
धनु 21:08 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:01
चंद्रोदय
05:55
चंद्रास्त
17:41
दिनमान
11h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2131
शक संवत
1996, जय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:44
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:41 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:18 – 13:44
यमगंड
08:00 – 09:26
गुलिक काल
10:52 – 12:18

16 जनवरी 2075 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:35 – 08:00शुभ
अमृत08:00 – 09:26शुभ
काल09:26 – 10:52टालें
शुभ10:52 – 12:18शुभ
रोग12:18 – 13:44टालें
उद्वेग13:44 – 15:10टालें
चर15:10 – 16:36सामान्य
लाभ16:36 – 18:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:01 – 19:36टालें
शुभ19:36 – 21:10शुभ
अमृत21:10 – 22:44शुभ
चर22:44 – 00:18सामान्य
रोग00:18 – 01:52टालें
काल01:52 – 03:26टालें
लाभ03:26 – 05:01शुभ
उद्वेग05:01 – 06:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3507:32दिन
चंद्र07:3208:29दिन
शनि08:2909:26दिन
गुरु09:2610:24दिन
मंगल10:2411:21दिन
सूर्य11:2112:18दिन
शुक्र12:1813:15दिन
बुध13:1514:13दिन
चंद्र14:1315:10दिन
शनि15:1016:07दिन
गुरु16:0717:04दिन
मंगल17:0418:01दिन
सूर्य18:0119:04रात
शुक्र19:0420:07रात
बुध20:0721:10रात
चंद्र21:1022:13रात
शनि22:1323:15रात
गुरु23:1500:18रात
मंगल00:1801:21रात
सूर्य01:2102:24रात
शुक्र02:2403:26रात
बुध03:2604:29रात
चंद्र04:2905:32रात
शनि05:3206:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 जन॰ 2075माघ अमावस्याअमावस्या
20 जन॰ 2075विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 जन॰ 2075शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 जन॰ 2075प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2075माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2075संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 फ़र॰ 2075कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 फ़र॰ 2075कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2075प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2075कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.9055° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।