17 दिसंबर 2026 को दोहा का पंचांग

गुरुवार, 17 दिसंबर 2026, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

गुरुवार, 17 दिसंबर 2026 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (20:56 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (13:00 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:12 पर और सूर्यास्त 16:47 पर है। राहुकाल 12:49 से 14:08 तक है।

दिन और रात
दिन 06:12 – 16:47
रात 06:13 तक
तिथि
अष्टमी, 20:56 तक
नवमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 13:00 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 20:56 तक
शुक्ल नवमी 20:44, 18 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 13:40, 18 दिस॰ तक
योग
सिद्धि 10:51 तक
व्यतीपातअशुभ 09:49, 18 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:42 तक
बव 20:56 तक
बालव 08:57, 18 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 06:43 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
16:47
चंद्रोदय
11:31
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
11:08 – 11:51

अशुभ समय

राहुकाल
12:49 – 14:08
यमगंड
06:12 – 07:32
गुलिक काल
08:51 – 10:10

17 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:12 – 07:32शुभ
रोग07:32 – 08:51टालें
उद्वेग08:51 – 10:10टालें
चर10:10 – 11:29सामान्य
लाभ11:29 – 12:49शुभ
अमृत12:49 – 14:08शुभ
काल14:08 – 15:27टालें
शुभ15:27 – 16:47शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:47 – 18:27शुभ
चर18:27 – 20:08सामान्य
रोग20:08 – 21:49टालें
काल21:49 – 23:30टालें
लाभ23:30 – 01:10शुभ
उद्वेग01:10 – 02:51टालें
शुभ02:51 – 04:32शुभ
अमृत04:32 – 06:13शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1207:05दिन
मंगल07:0507:58दिन
सूर्य07:5808:51दिन
शुक्र08:5109:44दिन
बुध09:4410:37दिन
चंद्र10:3711:29दिन
शनि11:2912:22दिन
गुरु12:2213:15दिन
मंगल13:1514:08दिन
सूर्य14:0815:01दिन
शुक्र15:0115:54दिन
बुध15:5416:47दिन
चंद्र16:4717:54रात
शनि17:5419:01रात
गुरु19:0120:08रात
मंगल20:0821:15रात
सूर्य21:1522:22रात
शुक्र22:2223:30रात
बुध23:3000:37रात
चंद्र00:3701:44रात
शनि01:4402:51रात
गुरु02:5103:58रात
मंगल03:5805:06रात
सूर्य05:0606:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2337° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।