19 दिसंबर 2027 को दोहा का पंचांग

रविवार, 19 दिसंबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

रविवार, 19 दिसंबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (01:04, 20 दिस॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (23:37 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 16:47 पर है। राहुकाल 15:28 से 16:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 16:47
रात 06:14 तक
तिथि
सप्तमी, 01:04 तक
अष्टमी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 23:37 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 दिसंबर 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 01:04, 20 दिस॰ तक
कृष्ण अष्टमी 23:23, 20 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 22:35, 20 दिस॰ तक
योग
प्रीति 18:07 तक
आयुष्मान 15:26, 20 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 14:02 तक
बव 01:04, 20 दिस॰ तक
बालव 12:10, 20 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 05:19, 20 दिस॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
16:47
चंद्रोदय
23:00
चंद्रास्त
10:42
दिनमान
10h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
11:09 – 11:51

अशुभ समय

राहुकाल
15:28 – 16:47
यमगंड
11:30 – 12:49
गुलिक काल
14:09 – 15:28

19 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:13 – 07:32टालें
चर07:32 – 08:52सामान्य
लाभ08:52 – 10:11शुभ
अमृत10:11 – 11:30शुभ
काल11:30 – 12:49टालें
शुभ12:49 – 14:09शुभ
रोग14:09 – 15:28टालें
उद्वेग15:28 – 16:47टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ16:47 – 18:28शुभ
अमृत18:28 – 20:09शुभ
चर20:09 – 21:50सामान्य
रोग21:50 – 23:31टालें
काल23:31 – 01:11टालें
लाभ01:11 – 02:52शुभ
उद्वेग02:52 – 04:33टालें
शुभ04:33 – 06:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:1307:06दिन
शुक्र07:0607:59दिन
बुध07:5908:52दिन
चंद्र08:5209:45दिन
शनि09:4510:37दिन
गुरु10:3711:30दिन
मंगल11:3012:23दिन
सूर्य12:2313:16दिन
शुक्र13:1614:09दिन
बुध14:0915:02दिन
चंद्र15:0215:54दिन
शनि15:5416:47दिन
गुरु16:4717:54रात
मंगल17:5419:02रात
सूर्य19:0220:09रात
शुक्र20:0921:16रात
बुध21:1622:23रात
चंद्र22:2323:31रात
शनि23:3100:38रात
गुरु00:3801:45रात
मंगल01:4502:52रात
सूर्य02:5203:59रात
शुक्र03:5905:07रात
बुध05:0706:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
31 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2477° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।