25 सितंबर 2028 को दोहा का पंचांग

सोमवार, 25 सितंबर 2028, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

सोमवार, 25 सितंबर 2028 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (04:28, 26 सित॰ तक), नक्षत्र मूल (00:51, 26 सित॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 17:26 पर है। राहुकाल 06:54 से 08:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 17:26
रात 05:24 तक
तिथि
अष्टमी, 04:28 तक
नवमी
नक्षत्र
मूल, 00:51 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 सितंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 04:28, 26 सित॰ तक
शुक्ल नवमी 05:39, 27 सित॰ तक
नक्षत्र
मूल 00:51, 26 सित॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 02:32, 27 सित॰ तक
योग
सौभाग्य 02:28, 26 सित॰ तक
शोभन 02:17, 27 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:10 तक
बव 04:28, 26 सित॰ तक
बालव 16:59, 26 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
17:26
चंद्रोदय
12:10
चंद्रास्त
22:51
दिनमान
12h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:48 – 04:36
अभिजीत मुहूर्त
11:01 – 11:49

अशुभ समय

राहुकाल
06:54 – 08:24
यमगंड
09:54 – 11:25
गुलिक काल
12:55 – 14:25

25 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:23 – 06:54शुभ
काल06:54 – 08:24टालें
शुभ08:24 – 09:54शुभ
रोग09:54 – 11:25टालें
उद्वेग11:25 – 12:55टालें
चर12:55 – 14:25सामान्य
लाभ14:25 – 15:56शुभ
अमृत15:56 – 17:26शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:26 – 18:56सामान्य
रोग18:56 – 20:26टालें
काल20:26 – 21:55टालें
लाभ21:55 – 23:25शुभ
उद्वेग23:25 – 00:55टालें
शुभ00:55 – 02:24शुभ
अमृत02:24 – 03:54शुभ
चर03:54 – 05:24सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2306:23दिन
शनि06:2307:24दिन
गुरु07:2408:24दिन
मंगल08:2409:24दिन
सूर्य09:2410:24दिन
शुक्र10:2411:25दिन
बुध11:2512:25दिन
चंद्र12:2513:25दिन
शनि13:2514:25दिन
गुरु14:2515:26दिन
मंगल15:2616:26दिन
सूर्य16:2617:26दिन
शुक्र17:2618:26रात
बुध18:2619:26रात
चंद्र19:2620:26रात
शनि20:2621:25रात
गुरु21:2522:25रात
मंगल22:2523:25रात
सूर्य23:2500:25रात
शुक्र00:2501:24रात
बुध01:2402:24रात
चंद्र02:2403:24रात
शनि03:2404:24रात
गुरु04:2405:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2584° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।