1 नवंबर 2028 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 1 नवंबर 2028, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 1 नवंबर 2028 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (10:38 तक), नक्षत्र अश्विनी (06:39, 2 नव॰ तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 16:52 पर है। राहुकाल 11:17 से 12:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 16:52
रात 05:42 तक
तिथि
चतुर्दशी, 10:38 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
अश्विनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 नवंबर 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 10:38 तक
पूर्णिमा 12:17, 2 नव॰ तक
नक्षत्र
अश्विनी 06:39, 2 नव॰ तक
योग
वज्रअशुभ 13:44 तक
सिद्धि 13:53, 2 नव॰ तक
करण
वणिज 10:38 तक
विष्टि (भद्रा) 23:30 तक
बव 12:17, 2 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
16:52
चंद्रोदय
16:02
चंद्रास्त
04:39
दिनमान
11h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:59 – 04:50
अभिजीत मुहूर्त
10:54 – 11:39 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:17 – 12:41
यमगंड
07:05 – 08:29
गुलिक काल
09:53 – 11:17

1 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:41 – 07:05शुभ
अमृत07:05 – 08:29शुभ
काल08:29 – 09:53टालें
शुभ09:53 – 11:17शुभ
रोग11:17 – 12:41टालें
उद्वेग12:41 – 14:05टालें
चर14:05 – 15:28सामान्य
लाभ15:28 – 16:52शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:52 – 18:28टालें
शुभ18:28 – 20:05शुभ
अमृत20:05 – 21:41शुभ
चर21:41 – 23:17सामान्य
रोग23:17 – 00:53टालें
काल00:53 – 02:30टालें
लाभ02:30 – 04:06शुभ
उद्वेग04:06 – 05:42टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4106:37दिन
चंद्र06:3707:33दिन
शनि07:3308:29दिन
गुरु08:2909:25दिन
मंगल09:2510:21दिन
सूर्य10:2111:17दिन
शुक्र11:1712:13दिन
बुध12:1313:09दिन
चंद्र13:0914:05दिन
शनि14:0515:00दिन
गुरु15:0015:56दिन
मंगल15:5616:52दिन
सूर्य16:5217:56रात
शुक्र17:5619:01रात
बुध19:0120:05रात
चंद्र20:0521:09रात
शनि21:0922:13रात
गुरु22:1323:17रात
मंगल23:1700:21रात
सूर्य00:2101:25रात
शुक्र01:2502:30रात
बुध02:3003:34रात
चंद्र03:3404:38रात
शनि04:3805:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 नव॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 नव॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2599° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।