25 अप्रैल 2029 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 25 अप्रैल 2029, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 25 अप्रैल 2029 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (00:52, 26 अप्रैल तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (10:19 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:02 पर और सूर्यास्त 18:01 पर है। राहुकाल 11:31 से 13:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:02 – 18:01
रात 05:01 तक
तिथि
द्वादशी, 00:52 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 10:19 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 अप्रैल 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 00:52, 26 अप्रैल तक
शुक्ल त्रयोदशी 21:14, 26 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 07:43, 26 अप्रैल तक
योग
ध्रुव 13:42 तक
व्याघातअशुभ 09:45, 26 अप्रैल तक
करण
बव 14:33 तक
बालव 00:52, 26 अप्रैल तक
कौलव 11:05, 26 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सिंह 15:43 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:02
सूर्यास्त
18:01
चंद्रोदय
14:52
चंद्रास्त
02:23
दिनमान
12h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:34 – 04:18
अभिजीत मुहूर्त
11:06 – 11:57 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:31 – 13:09
यमगंड
06:39 – 08:17
गुलिक काल
09:54 – 11:31

25 अप्रैल 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:02 – 06:39शुभ
अमृत06:39 – 08:17शुभ
काल08:17 – 09:54टालें
शुभ09:54 – 11:31शुभ
रोग11:31 – 13:09टालें
उद्वेग13:09 – 14:46टालें
चर14:46 – 16:24सामान्य
लाभ16:24 – 18:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:01 – 19:23टालें
शुभ19:23 – 20:46शुभ
अमृत20:46 – 22:09शुभ
चर22:09 – 23:31सामान्य
रोग23:31 – 00:54टालें
काल00:54 – 02:16टालें
लाभ02:16 – 03:39शुभ
उद्वेग03:39 – 05:01टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:0206:07दिन
चंद्र06:0707:12दिन
शनि07:1208:17दिन
गुरु08:1709:22दिन
मंगल09:2210:27दिन
सूर्य10:2711:31दिन
शुक्र11:3112:36दिन
बुध12:3613:41दिन
चंद्र13:4114:46दिन
शनि14:4615:51दिन
गुरु15:5116:56दिन
मंगल16:5618:01दिन
सूर्य18:0118:56रात
शुक्र18:5619:51रात
बुध19:5120:46रात
चंद्र20:4621:41रात
शनि21:4122:36रात
गुरु22:3623:31रात
मंगल23:3100:26रात
सूर्य00:2601:21रात
शुक्र01:2102:16रात
बुध02:1603:11रात
चंद्र03:1104:06रात
शनि04:0605:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 अप्रैल 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अप्रैल 2029चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
1 मई 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 मई 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 मई 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 मई 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 मई 2029वैशाख अमावस्याअमावस्या
14 मई 2029वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मई 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 मई 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2665° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।