28 अक्टूबर 2029 को दोहा का पंचांग

रविवार, 28 अक्टूबर 2029, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

रविवार, 28 अक्टूबर 2029 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (01:43, 29 अक्टू॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (18:55 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 16:55 पर है। राहुकाल 15:31 से 16:55 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 16:55
रात 05:39 तक
तिथि
षष्ठी, 01:43 तक
सप्तमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 18:55 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 01:43, 29 अक्टू॰ तक
कृष्ण सप्तमी 02:27, 30 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 20:24, 29 अक्टू॰ तक
योग
शिव 10:42 तक
सिद्ध 10:31, 29 अक्टू॰ तक
करण
गर 13:05 तक
वणिज 01:43, 29 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:10, 29 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
16:55
चंद्रोदय
21:30
चंद्रास्त
10:32
दिनमान
11h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:57 – 04:48
अभिजीत मुहूर्त
10:54 – 11:40

अशुभ समय

राहुकाल
15:31 – 16:55
यमगंड
11:17 – 12:42
गुलिक काल
14:06 – 15:31

28 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:39 – 07:03टालें
चर07:03 – 08:28सामान्य
लाभ08:28 – 09:52शुभ
अमृत09:52 – 11:17शुभ
काल11:17 – 12:42टालें
शुभ12:42 – 14:06शुभ
रोग14:06 – 15:31टालें
उद्वेग15:31 – 16:55टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ16:55 – 18:31शुभ
अमृत18:31 – 20:06शुभ
चर20:06 – 21:42सामान्य
रोग21:42 – 23:17टालें
काल23:17 – 00:53टालें
लाभ00:53 – 02:28शुभ
उद्वेग02:28 – 04:04टालें
शुभ04:04 – 05:39शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3906:35दिन
शुक्र06:3507:31दिन
बुध07:3108:28दिन
चंद्र08:2809:24दिन
शनि09:2410:21दिन
गुरु10:2111:17दिन
मंगल11:1712:13दिन
सूर्य12:1313:10दिन
शुक्र13:1014:06दिन
बुध14:0615:02दिन
चंद्र15:0215:59दिन
शनि15:5916:55दिन
गुरु16:5517:59रात
मंगल17:5919:03रात
सूर्य19:0320:06रात
शुक्र20:0621:10रात
बुध21:1022:14रात
चंद्र22:1423:17रात
शनि23:1700:21रात
गुरु00:2101:25रात
मंगल01:2502:28रात
सूर्य02:2803:32रात
शुक्र03:3204:36रात
बुध04:3605:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2737° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।