23 जुलाई 2025 को दुबई का पंचांग

बुधवार, 23 जुलाई 2025, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

बुधवार, 23 जुलाई 2025 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (00:59, 24 जुल॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (16:24 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 12:25 से 14:06 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 19:08
रात 05:42 तक
तिथि
चतुर्दशी, 00:59 तक
अमावस्या
नक्षत्र
आर्द्रा, 16:24 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 जुलाई 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 00:59, 24 जुल॰ तक
अमावस्या 23:11, 24 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 15:13, 24 जुल॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 11:04 तक
हर्षण 08:20, 24 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 14:02 तक
शकुनि 00:59, 24 जुल॰ तक
चतुष्पद 12:01, 24 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
03:48
चंद्रास्त
18:16
दिनमान
13h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:52 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:25 – 14:06
यमगंड
07:22 – 09:03
गुलिक काल
10:44 – 12:25

23 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:41 – 07:22शुभ
अमृत07:22 – 09:03शुभ
काल09:03 – 10:44टालें
शुभ10:44 – 12:25शुभ
रोग12:25 – 14:06टालें
उद्वेग14:06 – 15:47टालें
चर15:47 – 17:27सामान्य
लाभ17:27 – 19:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:08 – 20:27टालें
शुभ20:27 – 21:47शुभ
अमृत21:47 – 23:06शुभ
चर23:06 – 00:25सामान्य
रोग00:25 – 01:44टालें
काल01:44 – 03:03टालें
लाभ03:03 – 04:23शुभ
उद्वेग04:23 – 05:42टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4106:49दिन
चंद्र06:4907:56दिन
शनि07:5609:03दिन
गुरु09:0310:10दिन
मंगल10:1011:18दिन
सूर्य11:1812:25दिन
शुक्र12:2513:32दिन
बुध13:3214:39दिन
चंद्र14:3915:47दिन
शनि15:4716:54दिन
गुरु16:5418:01दिन
मंगल18:0119:08दिन
सूर्य19:0820:01रात
शुक्र20:0120:54रात
बुध20:5421:47रात
चंद्र21:4722:39रात
शनि22:3923:32रात
गुरु23:3200:25रात
मंगल00:2501:18रात
सूर्य01:1802:11रात
शुक्र02:1103:03रात
बुध03:0303:56रात
चंद्र03:5604:49रात
शनि04:4905:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
12 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2141° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।