17 दिसंबर 2026 को दुबई का पंचांग

गुरुवार, 17 दिसंबर 2026, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

गुरुवार, 17 दिसंबर 2026 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (21:56 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (14:00 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:57 पर और सूर्यास्त 17:32 पर है। राहुकाल 13:34 से 14:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:57 – 17:32
रात 06:58 तक
तिथि
अष्टमी, 21:56 तक
नवमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 14:00 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 21:56 तक
शुक्ल नवमी 21:44, 18 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 14:40, 18 दिस॰ तक
योग
सिद्धि 11:51 तक
व्यतीपातअशुभ 10:49, 18 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:42 तक
बव 21:56 तक
बालव 09:57, 18 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 07:43 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:57
सूर्यास्त
17:32
चंद्रोदय
12:16
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:10 – 06:03
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
13:34 – 14:53
यमगंड
06:57 – 08:16
गुलिक काल
09:36 – 10:55

17 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:57 – 08:16शुभ
रोग08:16 – 09:36टालें
उद्वेग09:36 – 10:55टालें
चर10:55 – 12:14सामान्य
लाभ12:14 – 13:34शुभ
अमृत13:34 – 14:53शुभ
काल14:53 – 16:12टालें
शुभ16:12 – 17:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:32 – 19:12शुभ
चर19:12 – 20:53सामान्य
रोग20:53 – 22:34टालें
काल22:34 – 00:15टालें
लाभ00:15 – 01:55शुभ
उद्वेग01:55 – 03:36टालें
शुभ03:36 – 05:17शुभ
अमृत05:17 – 06:58शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:5707:50दिन
मंगल07:5008:43दिन
सूर्य08:4309:36दिन
शुक्र09:3610:29दिन
बुध10:2911:22दिन
चंद्र11:2212:14दिन
शनि12:1413:07दिन
गुरु13:0714:00दिन
मंगल14:0014:53दिन
सूर्य14:5315:46दिन
शुक्र15:4616:39दिन
बुध16:3917:32दिन
चंद्र17:3218:39रात
शनि18:3919:46रात
गुरु19:4620:53रात
मंगल20:5322:00रात
सूर्य22:0023:08रात
शुक्र23:0800:15रात
बुध00:1501:22रात
चंद्र01:2202:29रात
शनि02:2903:36रात
गुरु03:3604:43रात
मंगल04:4305:51रात
सूर्य05:5106:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2337° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।