23 जुलाई 2027 को दुबई का पंचांग

शुक्रवार, 23 जुलाई 2027, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

शुक्रवार, 23 जुलाई 2027 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (07:11, 24 जुल॰ तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (00:23, 24 जुल॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 10:44 से 12:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 19:08
रात 05:42 तक
तिथि
पंचमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 00:23 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 जुलाई 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 07:11, 24 जुल॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 00:23, 24 जुल॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 02:22, 25 जुल॰ तक
योग
शोभन 18:33 तक
अतिगंडअशुभ 18:47, 24 जुल॰ तक
करण
कौलव 18:22 तक
तैतिल 07:11, 24 जुल॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 17:49 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
21:51
चंद्रास्त
09:32
दिनमान
13h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
10:44 – 12:25
यमगंड
15:47 – 17:28
गुलिक काल
07:22 – 09:03

23 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:41 – 07:22सामान्य
लाभ07:22 – 09:03शुभ
अमृत09:03 – 10:44शुभ
काल10:44 – 12:25टालें
शुभ12:25 – 14:06शुभ
रोग14:06 – 15:47टालें
उद्वेग15:47 – 17:28टालें
चर17:28 – 19:08सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:08 – 20:28टालें
काल20:28 – 21:47टालें
लाभ21:47 – 23:06शुभ
उद्वेग23:06 – 00:25टालें
शुभ00:25 – 01:44शुभ
अमृत01:44 – 03:03शुभ
चर03:03 – 04:23सामान्य
रोग04:23 – 05:42टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4106:48दिन
बुध06:4807:56दिन
चंद्र07:5609:03दिन
शनि09:0310:10दिन
गुरु10:1011:18दिन
मंगल11:1812:25दिन
सूर्य12:2513:32दिन
शुक्र13:3214:39दिन
बुध14:3915:47दिन
चंद्र15:4716:54दिन
शनि16:5418:01दिन
गुरु18:0119:08दिन
मंगल19:0820:01रात
सूर्य20:0120:54रात
शुक्र20:5421:47रात
बुध21:4722:39रात
चंद्र22:3923:32रात
शनि23:3200:25रात
गुरु00:2501:18रात
मंगल01:1802:11रात
सूर्य02:1103:03रात
शुक्र03:0303:56रात
बुध03:5604:49रात
चंद्र04:4905:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2420° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।