22 नवंबर 2027 को दुबई का पंचांग

सोमवार, 22 नवंबर 2027, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

सोमवार, 22 नवंबर 2027 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (13:58 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (19:13 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 17:29 पर है। राहुकाल 08:01 से 09:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 17:29
रात 06:41 तक
तिथि
नवमी, 13:58 तक
दशमी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 19:13 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 नवंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण नवमी 13:58 तक
कृष्ण दशमी 12:15, 23 नव॰ तक
नक्षत्र
योग
वैधृतिअशुभ 15:13 तक
विष्कंभअशुभ 12:38, 23 नव॰ तक
करण
गर 13:58 तक
वणिज 01:05, 23 नव॰ तक
विष्टि (भद्रा) 12:15, 23 नव॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 00:57, 23 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
17:29
चंद्रोदय
00:49
चंद्रास्त
13:25
दिनमान
10h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
08:01 – 09:22
यमगंड
10:43 – 12:04
गुलिक काल
13:25 – 14:46

22 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:40 – 08:01शुभ
काल08:01 – 09:22टालें
शुभ09:22 – 10:43शुभ
रोग10:43 – 12:04टालें
उद्वेग12:04 – 13:25टालें
चर13:25 – 14:46सामान्य
लाभ14:46 – 16:08शुभ
अमृत16:08 – 17:29शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:29 – 19:08सामान्य
रोग19:08 – 20:47टालें
काल20:47 – 22:26टालें
लाभ22:26 – 00:05शुभ
उद्वेग00:05 – 01:44टालें
शुभ01:44 – 03:23शुभ
अमृत03:23 – 05:02शुभ
चर05:02 – 06:41सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4007:34दिन
शनि07:3408:28दिन
गुरु08:2809:22दिन
मंगल09:2210:16दिन
सूर्य10:1611:10दिन
शुक्र11:1012:04दिन
बुध12:0412:58दिन
चंद्र12:5813:52दिन
शनि13:5214:46दिन
गुरु14:4615:41दिन
मंगल15:4116:35दिन
सूर्य16:3517:29दिन
शुक्र17:2918:35रात
बुध18:3519:41रात
चंद्र19:4120:47रात
शनि20:4721:53रात
गुरु21:5322:59रात
मंगल22:5900:05रात
सूर्य00:0501:11रात
शुक्र01:1102:17रात
बुध02:1703:23रात
चंद्र03:2304:29रात
शनि04:2905:35रात
गुरु05:3506:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2467° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।