23 जुलाई 2029 को दुबई का पंचांग

सोमवार, 23 जुलाई 2029, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

सोमवार, 23 जुलाई 2029 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (19:30 तक), नक्षत्र मूल (20:27 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 07:22 से 09:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 19:08
रात 05:42 तक
तिथि
त्रयोदशी, 19:30 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मूल, 20:27 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 जुलाई 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 19:30 तक
शुक्ल चतुर्दशी 18:21, 24 जुल॰ तक
नक्षत्र
मूल 20:27 तक
पूर्वाषाढ़ा 20:04, 24 जुल॰ तक
योग
इंद्र 14:43 तक
वैधृतिअशुभ 12:41, 24 जुल॰ तक
करण
कौलव 08:12 तक
तैतिल 19:30 तक
गर 06:52, 24 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
17:25
चंद्रास्त
03:16
दिनमान
13h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
07:22 – 09:03
यमगंड
10:44 – 12:25
गुलिक काल
14:06 – 15:46

23 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:41 – 07:22शुभ
काल07:22 – 09:03टालें
शुभ09:03 – 10:44शुभ
रोग10:44 – 12:25टालें
उद्वेग12:25 – 14:06टालें
चर14:06 – 15:46सामान्य
लाभ15:46 – 17:27शुभ
अमृत17:27 – 19:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:08 – 20:27सामान्य
रोग20:27 – 21:47टालें
काल21:47 – 23:06टालें
लाभ23:06 – 00:25शुभ
उद्वेग00:25 – 01:44टालें
शुभ01:44 – 03:03शुभ
अमृत03:03 – 04:23शुभ
चर04:23 – 05:42सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4106:49दिन
शनि06:4907:56दिन
गुरु07:5609:03दिन
मंगल09:0310:10दिन
सूर्य10:1011:18दिन
शुक्र11:1812:25दिन
बुध12:2513:32दिन
चंद्र13:3214:39दिन
शनि14:3915:46दिन
गुरु15:4616:54दिन
मंगल16:5418:01दिन
सूर्य18:0119:08दिन
शुक्र19:0820:01रात
बुध20:0120:54रात
चंद्र20:5421:47रात
शनि21:4722:39रात
गुरु22:3923:32रात
मंगल23:3200:25रात
सूर्य00:2501:18रात
शुक्र01:1802:11रात
बुध02:1103:03रात
चंद्र03:0303:56रात
शनि03:5604:49रात
गुरु04:4905:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2700° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।