14 मार्च 2025 को द्वारका का पंचांग

शुक्रवार, 14 मार्च 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 14 मार्च 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (12:24 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (08:54, 15 मार्च तक) और योग शूल है। सूर्योदय 07:03 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 11:33 से 13:03 तक है।

दिन और रात
दिन 07:03 – 19:03
रात 07:02 तक
तिथि
पूर्णिमा, 12:24 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 मार्च 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
पूर्णिमा 12:24 तक
कृष्ण प्रतिपदा 14:33, 15 मार्च तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 08:54, 15 मार्च तक
योग
शूलअशुभ 13:23 तक
गंडअशुभ 13:59, 15 मार्च तक
करण
बव 12:24 तक
बालव 01:26, 15 मार्च तक
कौलव 14:33, 15 मार्च तक
चंद्र राशि
सिंह 12:56 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:03
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
19:13
चंद्रास्त
07:01
दिनमान
11h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:27 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
12:39 – 13:27

अशुभ समय

राहुकाल
11:33 – 13:03
यमगंड
16:03 – 17:33
गुलिक काल
08:33 – 10:03

14 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:03 – 08:33सामान्य
लाभ08:33 – 10:03शुभ
अमृत10:03 – 11:33शुभ
काल11:33 – 13:03टालें
शुभ13:03 – 14:33शुभ
रोग14:33 – 16:03टालें
उद्वेग16:03 – 17:33टालें
चर17:33 – 19:03सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:03 – 20:33टालें
काल20:33 – 22:03टालें
लाभ22:03 – 23:32शुभ
उद्वेग23:32 – 01:02टालें
शुभ01:02 – 02:32शुभ
अमृत02:32 – 04:02शुभ
चर04:02 – 05:32सामान्य
रोग05:32 – 07:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0308:03दिन
बुध08:0309:03दिन
चंद्र09:0310:03दिन
शनि10:0311:03दिन
गुरु11:0312:03दिन
मंगल12:0313:03दिन
सूर्य13:0314:03दिन
शुक्र14:0315:03दिन
बुध15:0316:03दिन
चंद्र16:0317:03दिन
शनि17:0318:03दिन
गुरु18:0319:03दिन
मंगल19:0320:03रात
सूर्य20:0321:03रात
शुक्र21:0322:03रात
बुध22:0323:02रात
चंद्र23:0200:02रात
शनि00:0201:02रात
गुरु01:0202:02रात
मंगल02:0203:02रात
सूर्य03:0204:02रात
शुक्र04:0205:02रात
बुध05:0206:02रात
चंद्र06:0207:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2091° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।