10 अप्रैल 2025 को द्वारका का पंचांग

गुरुवार, 10 अप्रैल 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 10 अप्रैल 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (01:01, 11 अप्रैल तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (12:24 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 14:29 से 16:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 19:12
रात 06:37 तक
तिथि
त्रयोदशी, 01:01 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 12:24 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 01:01, 11 अप्रैल तक
शुक्ल चतुर्दशी 03:22, 12 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 15:10, 11 अप्रैल तक
योग
वृद्धि 18:58 तक
ध्रुव 19:45, 11 अप्रैल तक
करण
कौलव 11:56 तक
तैतिल 01:01, 11 अप्रैल तक
गर 14:10, 11 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सिंह 19:04 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
17:09
चंद्रास्त
05:03
दिनमान
12h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
12:30 – 13:20

अशुभ समय

राहुकाल
14:29 – 16:03
यमगंड
06:38 – 08:12
गुलिक काल
09:47 – 11:21

10 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:38 – 08:12शुभ
रोग08:12 – 09:47टालें
उद्वेग09:47 – 11:21टालें
चर11:21 – 12:55सामान्य
लाभ12:55 – 14:29शुभ
अमृत14:29 – 16:03शुभ
काल16:03 – 17:38टालें
शुभ17:38 – 19:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:12 – 20:38शुभ
चर20:38 – 22:03सामान्य
रोग22:03 – 23:29टालें
काल23:29 – 00:55टालें
लाभ00:55 – 02:20शुभ
उद्वेग02:20 – 03:46टालें
शुभ03:46 – 05:12शुभ
अमृत05:12 – 06:37शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3807:41दिन
मंगल07:4108:44दिन
सूर्य08:4409:47दिन
शुक्र09:4710:49दिन
बुध10:4911:52दिन
चंद्र11:5212:55दिन
शनि12:5513:58दिन
गुरु13:5815:01दिन
मंगल15:0116:03दिन
सूर्य16:0317:06दिन
शुक्र17:0618:09दिन
बुध18:0919:12दिन
चंद्र19:1220:09रात
शनि20:0921:06रात
गुरु21:0622:03रात
मंगल22:0323:00रात
सूर्य23:0023:58रात
शुक्र23:5800:55रात
बुध00:5501:52रात
चंद्र01:5202:49रात
शनि02:4903:46रात
गुरु03:4604:43रात
मंगल04:4305:40रात
सूर्य05:4006:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 अप्रैल 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अप्रैल 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 अप्रैल 2025वैशाख अमावस्याअमावस्या
1 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2101° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।