16 नवंबर 2029 को द्वारका का पंचांग

शुक्रवार, 16 नवंबर 2029, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 16 नवंबर 2029 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (23:28 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (08:04, 17 नव॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 07:06 पर और सूर्यास्त 18:10 पर है। राहुकाल 11:15 से 12:38 तक है।

दिन और रात
दिन 07:06 – 18:10
रात 07:07 तक
तिथि
एकादशी, 23:28 तक
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 नवंबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 23:28 तक
शुक्ल द्वादशी 01:54, 18 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 08:04, 17 नव॰ तक
योग
हर्षण 12:11 तक
वज्रअशुभ 12:52, 17 नव॰ तक
करण
वणिज 10:21 तक
विष्टि (भद्रा) 23:28 तक
बव 12:40, 17 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:06
सूर्यास्त
18:10
चंद्रोदय
15:02
चंद्रास्त
02:56
दिनमान
11h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
12:16 – 13:00

अशुभ समय

राहुकाल
11:15 – 12:38
यमगंड
15:24 – 16:47
गुलिक काल
08:29 – 09:52

16 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:06 – 08:29सामान्य
लाभ08:29 – 09:52शुभ
अमृत09:52 – 11:15शुभ
काल11:15 – 12:38टालें
शुभ12:38 – 14:01शुभ
रोग14:01 – 15:24टालें
उद्वेग15:24 – 16:47टालें
चर16:47 – 18:10सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:10 – 19:47टालें
काल19:47 – 21:24टालें
लाभ21:24 – 23:02शुभ
उद्वेग23:02 – 00:39टालें
शुभ00:39 – 02:16शुभ
अमृत02:16 – 03:53शुभ
चर03:53 – 05:30सामान्य
रोग05:30 – 07:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0608:02दिन
बुध08:0208:57दिन
चंद्र08:5709:52दिन
शनि09:5210:48दिन
गुरु10:4811:43दिन
मंगल11:4312:38दिन
सूर्य12:3813:34दिन
शुक्र13:3414:29दिन
बुध14:2915:24दिन
चंद्र15:2416:20दिन
शनि16:2017:15दिन
गुरु17:1518:10दिन
मंगल18:1019:15रात
सूर्य19:1520:20रात
शुक्र20:2021:24रात
बुध21:2422:29रात
चंद्र22:2923:34रात
शनि23:3400:39रात
गुरु00:3901:43रात
मंगल01:4302:48रात
सूर्य02:4803:53रात
शुक्र03:5304:58रात
बुध04:5806:02रात
चंद्र06:0207:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2744° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।