8 जनवरी 2025 को ईरोड का पंचांग

बुधवार, 8 जनवरी 2025, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 8 जनवरी 2025 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (14:26 तक), नक्षत्र अश्विनी (16:29 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 18:10 पर है। राहुकाल 12:25 से 13:52 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 18:10
रात 06:41 तक
तिथि
नवमी, 14:26 तक
दशमी
नक्षत्र
अश्विनी, 16:29 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 जनवरी 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 14:26 तक
शुक्ल दशमी 12:23, 9 जन॰ तक
नक्षत्र
भरणी 15:07, 9 जन॰ तक
योग
सिद्ध 20:23 तक
साध्य 17:29, 9 जन॰ तक
करण
कौलव 14:26 तक
तैतिल 01:24, 9 जन॰ तक
गर 12:23, 9 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
18:10
चंद्रोदय
13:02
चंद्रास्त
01:00
दिनमान
11h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:00 – 05:50
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:48 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:25 – 13:52
यमगंड
08:07 – 09:33
गुलिक काल
10:59 – 12:25

8 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:40 – 08:07शुभ
अमृत08:07 – 09:33शुभ
काल09:33 – 10:59टालें
शुभ10:59 – 12:25शुभ
रोग12:25 – 13:52टालें
उद्वेग13:52 – 15:18टालें
चर15:18 – 16:44सामान्य
लाभ16:44 – 18:10शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:10 – 19:44टालें
शुभ19:44 – 21:18शुभ
अमृत21:18 – 22:52शुभ
चर22:52 – 00:25सामान्य
रोग00:25 – 01:59टालें
काल01:59 – 03:33टालें
लाभ03:33 – 05:07शुभ
उद्वेग05:07 – 06:41टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4007:38दिन
चंद्र07:3808:35दिन
शनि08:3509:33दिन
गुरु09:3310:30दिन
मंगल10:3011:28दिन
सूर्य11:2812:25दिन
शुक्र12:2513:23दिन
बुध13:2314:20दिन
चंद्र14:2015:18दिन
शनि15:1816:15दिन
गुरु16:1517:13दिन
मंगल17:1318:10दिन
सूर्य18:1019:13रात
शुक्र19:1320:15रात
बुध20:1521:18रात
चंद्र21:1822:20रात
शनि22:2023:23रात
गुरु23:2300:25रात
मंगल00:2501:28रात
सूर्य01:2802:31रात
शुक्र02:3103:33रात
बुध03:3304:36रात
चंद्र04:3605:38रात
शनि05:3806:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2066° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।