14 दिसंबर 2026 को ईरोड का पंचांग

सोमवार, 14 दिसंबर 2026, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 14 दिसंबर 2026 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (19:16 तक), नक्षत्र श्रवण (09:12 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:29 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 07:55 से 09:21 तक है।

दिन और रात
दिन 06:29 – 17:57
रात 06:30 तक
तिथि
पंचमी, 19:16 तक
षष्ठी
नक्षत्र
श्रवण, 09:12 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 19:16 तक
शुक्ल षष्ठी 21:19, 15 दिस॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 09:12 तक
धनिष्ठा 11:53, 15 दिस॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 13:04 तक
हर्षण 13:38, 15 दिस॰ तक
करण
बालव 19:16 तक
कौलव 08:22, 15 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मकर 22:35 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:29
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
10:23
चंद्रास्त
22:19
दिनमान
11h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:39
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
07:55 – 09:21
यमगंड
10:47 – 12:13
गुलिक काल
13:39 – 15:05

14 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:29 – 07:55शुभ
काल07:55 – 09:21टालें
शुभ09:21 – 10:47शुभ
रोग10:47 – 12:13टालें
उद्वेग12:13 – 13:39टालें
चर13:39 – 15:05सामान्य
लाभ15:05 – 16:31शुभ
अमृत16:31 – 17:57शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:57 – 19:31सामान्य
रोग19:31 – 21:05टालें
काल21:05 – 22:39टालें
लाभ22:39 – 00:13शुभ
उद्वेग00:13 – 01:47टालें
शुभ01:47 – 03:21शुभ
अमृत03:21 – 04:56शुभ
चर04:56 – 06:30सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2907:26दिन
शनि07:2608:24दिन
गुरु08:2409:21दिन
मंगल09:2110:18दिन
सूर्य10:1811:16दिन
शुक्र11:1612:13दिन
बुध12:1313:10दिन
चंद्र13:1014:08दिन
शनि14:0815:05दिन
गुरु15:0516:03दिन
मंगल16:0317:00दिन
सूर्य17:0017:57दिन
शुक्र17:5719:00रात
बुध19:0020:03रात
चंद्र20:0321:05रात
शनि21:0522:08रात
गुरु22:0823:11रात
मंगल23:1100:13रात
सूर्य00:1301:16रात
शुक्र01:1602:19रात
बुध02:1903:21रात
चंद्र03:2104:24रात
शनि04:2405:27रात
गुरु05:2706:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2335° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।