22 दिसंबर 2026 को ईरोड का पंचांग

मंगलवार, 22 दिसंबर 2026, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 22 दिसंबर 2026 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (14:24 तक), नक्षत्र कृत्तिका (10:45 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 18:01 पर है। राहुकाल 15:09 से 16:35 तक है।

दिन और रात
दिन 06:33 – 18:01
रात 06:34 तक
तिथि
त्रयोदशी, 14:24 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 10:45 तक
रोहिणी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 14:24 तक
शुक्ल चतुर्दशी 10:47, 23 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 07:56, 23 दिस॰ तक
योग
साध्य 21:32 तक
शुभ 17:15, 23 दिस॰ तक
करण
तैतिल 14:24 तक
गर 00:38, 23 दिस॰ तक
वणिज 10:47, 23 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:33
सूर्यास्त
18:01
चंद्रोदय
16:12
चंद्रास्त
04:25
दिनमान
11h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
15:09 – 16:35
यमगंड
09:25 – 10:51
गुलिक काल
12:17 – 13:43

22 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:33 – 07:59टालें
उद्वेग07:59 – 09:25टालें
चर09:25 – 10:51सामान्य
लाभ10:51 – 12:17शुभ
अमृत12:17 – 13:43शुभ
काल13:43 – 15:09टालें
शुभ15:09 – 16:35शुभ
रोग16:35 – 18:01टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:01 – 19:35टालें
लाभ19:35 – 21:09शुभ
उद्वेग21:09 – 22:43टालें
शुभ22:43 – 00:17शुभ
अमृत00:17 – 01:51शुभ
चर01:51 – 03:25सामान्य
रोग03:25 – 05:00टालें
काल05:00 – 06:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3307:30दिन
सूर्य07:3008:28दिन
शुक्र08:2809:25दिन
बुध09:2510:22दिन
चंद्र10:2211:20दिन
शनि11:2012:17दिन
गुरु12:1713:14दिन
मंगल13:1414:12दिन
सूर्य14:1215:09दिन
शुक्र15:0916:06दिन
बुध16:0617:04दिन
चंद्र17:0418:01दिन
शनि18:0119:04रात
गुरु19:0420:06रात
मंगल20:0621:09रात
सूर्य21:0922:12रात
शुक्र22:1223:15रात
बुध23:1500:17रात
चंद्र00:1701:20रात
शनि01:2002:23रात
गुरु02:2303:25रात
मंगल03:2504:28रात
सूर्य04:2805:31रात
शुक्र05:3106:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2338° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।