5 जनवरी 2027 को ईरोड का पंचांग

मंगलवार, 5 जनवरी 2027, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 5 जनवरी 2027 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (20:40 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (03:07, 6 जन॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:39 पर और सूर्यास्त 18:08 पर है। राहुकाल 15:16 से 16:42 तक है।

दिन और रात
दिन 06:39 – 18:08
रात 06:40 तक
तिथि
त्रयोदशी, 20:40 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 03:07 तक
मूल
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 20:40 तक
कृष्ण चतुर्दशी 23:14, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 03:07, 6 जन॰ तक
मूल 06:08, 7 जन॰ तक
योग
गंडअशुभ 12:43 तक
वृद्धि 13:32, 6 जन॰ तक
करण
गर 07:26 तक
वणिज 20:40 तक
विष्टि (भद्रा) 09:56, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 03:07, 6 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:39
सूर्यास्त
18:08
चंद्रोदय
04:29
चंद्रास्त
16:04
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:59 – 05:49
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
15:16 – 16:42
यमगंड
09:31 – 10:58
गुलिक काल
12:24 – 13:50

5 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:39 – 08:05टालें
उद्वेग08:05 – 09:31टालें
चर09:31 – 10:58सामान्य
लाभ10:58 – 12:24शुभ
अमृत12:24 – 13:50शुभ
काल13:50 – 15:16टालें
शुभ15:16 – 16:42शुभ
रोग16:42 – 18:08टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:08 – 19:42टालें
लाभ19:42 – 21:16शुभ
उद्वेग21:16 – 22:50टालें
शुभ22:50 – 00:24शुभ
अमृत00:24 – 01:58शुभ
चर01:58 – 03:32सामान्य
रोग03:32 – 05:06टालें
काल05:06 – 06:40टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3907:37दिन
सूर्य07:3708:34दिन
शुक्र08:3409:31दिन
बुध09:3110:29दिन
चंद्र10:2911:26दिन
शनि11:2612:24दिन
गुरु12:2413:21दिन
मंगल13:2114:19दिन
सूर्य14:1915:16दिन
शुक्र15:1616:14दिन
बुध16:1417:11दिन
चंद्र17:1118:08दिन
शनि18:0819:11रात
गुरु19:1120:14रात
मंगल20:1421:16रात
सूर्य21:1622:19रात
शुक्र22:1923:21रात
बुध23:2100:24रात
चंद्र00:2401:27रात
शनि01:2702:29रात
गुरु02:2903:32रात
मंगल03:3204:34रात
सूर्य04:3405:37रात
शुक्र05:3706:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2344° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।