23 फ़रवरी 2028 को ईरोड का पंचांग

बुधवार, 23 फ़रवरी 2028, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 23 फ़रवरी 2028 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (10:44 तक), नक्षत्र श्रवण (01:57, 24 फ़र॰ तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 12:32 से 14:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 18:27
रात 06:36 तक
तिथि
त्रयोदशी, 10:44 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
श्रवण, 01:57 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 10:44 तक
कृष्ण चतुर्दशी 13:27, 24 फ़र॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 01:57, 24 फ़र॰ तक
धनिष्ठा 05:05, 25 फ़र॰ तक
योग
वरीयान 18:47 तक
परिघअशुभ 19:47, 24 फ़र॰ तक
करण
वणिज 10:44 तक
विष्टि (भद्रा) 00:05, 24 फ़र॰ तक
शकुनि 13:27, 24 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
05:03
चंद्रास्त
16:55
दिनमान
11h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:59 – 05:48
अभिजीत मुहूर्त
12:08 – 12:56 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:32 – 14:01
यमगंड
08:06 – 09:34
गुलिक काल
11:03 – 12:32

23 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:37 – 08:06शुभ
अमृत08:06 – 09:34शुभ
काल09:34 – 11:03टालें
शुभ11:03 – 12:32शुभ
रोग12:32 – 14:01टालें
उद्वेग14:01 – 15:30टालें
चर15:30 – 16:59सामान्य
लाभ16:59 – 18:27शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:27 – 19:59टालें
शुभ19:59 – 21:30शुभ
अमृत21:30 – 23:01शुभ
चर23:01 – 00:32सामान्य
रोग00:32 – 02:03टालें
काल02:03 – 03:34टालें
लाभ03:34 – 05:05शुभ
उद्वेग05:05 – 06:36टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3707:36दिन
चंद्र07:3608:35दिन
शनि08:3509:34दिन
गुरु09:3410:34दिन
मंगल10:3411:33दिन
सूर्य11:3312:32दिन
शुक्र12:3213:31दिन
बुध13:3114:31दिन
चंद्र14:3115:30दिन
शनि15:3016:29दिन
गुरु16:2917:28दिन
मंगल17:2818:27दिन
सूर्य18:2719:28रात
शुक्र19:2820:29रात
बुध20:2921:30रात
चंद्र21:3022:30रात
शनि22:3023:31रात
गुरु23:3100:32रात
मंगल00:3201:33रात
सूर्य01:3302:33रात
शुक्र02:3303:34रात
बुध03:3404:35रात
चंद्र04:3505:36रात
शनि05:3606:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2502° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।