28 अक्टूबर 2028 को ईरोड का पंचांग

शनिवार, 28 अक्टूबर 2028, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 28 अक्टूबर 2028 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (06:21, 29 अक्टू॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (22:30 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:10 पर और सूर्यास्त 17:55 पर है। राहुकाल 09:06 से 10:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:10 – 17:55
रात 06:10 तक
तिथि
एकादशी
नक्षत्र
शतभिषा, 22:30 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 06:21, 29 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 22:30 तक
पूर्वा भाद्रपद 01:30, 30 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 13:23 तक
ध्रुव 14:18, 29 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 17:04 तक
विष्टि (भद्रा) 06:21, 29 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:10
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
14:35
चंद्रास्त
02:05
दिनमान
11h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
09:06 – 10:34
यमगंड
13:30 – 14:59
गुलिक काल
06:10 – 07:38

28 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:10 – 07:38टालें
शुभ07:38 – 09:06शुभ
रोग09:06 – 10:34टालें
उद्वेग10:34 – 12:02टालें
चर12:02 – 13:30सामान्य
लाभ13:30 – 14:59शुभ
अमृत14:59 – 16:27शुभ
काल16:27 – 17:55टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:55 – 19:27शुभ
उद्वेग19:27 – 20:59टालें
शुभ20:59 – 22:31शुभ
अमृत22:31 – 00:02शुभ
चर00:02 – 01:34सामान्य
रोग01:34 – 03:06टालें
काल03:06 – 04:38टालें
लाभ04:38 – 06:10शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:1007:08दिन
गुरु07:0808:07दिन
मंगल08:0709:06दिन
सूर्य09:0610:05दिन
शुक्र10:0511:04दिन
बुध11:0412:02दिन
चंद्र12:0213:01दिन
शनि13:0114:00दिन
गुरु14:0014:59दिन
मंगल14:5915:57दिन
सूर्य15:5716:56दिन
शुक्र16:5617:55दिन
बुध17:5518:56रात
चंद्र18:5619:57रात
शनि19:5720:59रात
गुरु20:5922:00रात
मंगल22:0023:01रात
सूर्य23:0100:02रात
शुक्र00:0201:04रात
बुध01:0402:05रात
चंद्र02:0503:06रात
शनि03:0604:07रात
गुरु04:0705:09रात
मंगल05:0906:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2597° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।