22 जनवरी 2029 को ईरोड का पंचांग

सोमवार, 22 जनवरी 2029, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 22 जनवरी 2029 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (11:43 तक), नक्षत्र रेवती (07:12 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:43 पर और सूर्यास्त 18:18 पर है। राहुकाल 08:10 से 09:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:43 – 18:18
रात 06:43 तक
तिथि
सप्तमी, 11:43 तक
अष्टमी
नक्षत्र
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जनवरी 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 11:43 तक
शुक्ल अष्टमी 13:57, 23 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 07:12 तक
अश्विनी 09:56, 23 जन॰ तक
योग
सिद्ध 10:49 तक
साध्य 11:26, 23 जन॰ तक
करण
वणिज 11:43 तक
विष्टि (भद्रा) 00:53, 23 जन॰ तक
बव 13:57, 23 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 07:12 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:43
सूर्यास्त
18:18
चंद्रोदय
11:29
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:03 – 05:53
अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
08:10 – 09:37
यमगंड
11:03 – 12:30
गुलिक काल
13:57 – 15:24

22 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:43 – 08:10शुभ
काल08:10 – 09:37टालें
शुभ09:37 – 11:03शुभ
रोग11:03 – 12:30टालें
उद्वेग12:30 – 13:57टालें
चर13:57 – 15:24सामान्य
लाभ15:24 – 16:51शुभ
अमृत16:51 – 18:18शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:18 – 19:51सामान्य
रोग19:51 – 21:24टालें
काल21:24 – 22:57टालें
लाभ22:57 – 00:30शुभ
उद्वेग00:30 – 02:03टालें
शुभ02:03 – 03:37शुभ
अमृत03:37 – 05:10शुभ
चर05:10 – 06:43सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4307:41दिन
शनि07:4108:39दिन
गुरु08:3909:37दिन
मंगल09:3710:34दिन
सूर्य10:3411:32दिन
शुक्र11:3212:30दिन
बुध12:3013:28दिन
चंद्र13:2814:26दिन
शनि14:2615:24दिन
गुरु15:2416:22दिन
मंगल16:2217:20दिन
सूर्य17:2018:18दिन
शुक्र18:1819:20रात
बुध19:2020:22रात
चंद्र20:2221:24रात
शनि21:2422:26रात
गुरु22:2623:28रात
मंगल23:2800:30रात
सूर्य00:3001:32रात
शुक्र01:3202:34रात
बुध02:3403:37रात
चंद्र03:3704:39रात
शनि04:3905:41रात
गुरु05:4106:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2630° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।