2 सितंबर 2029 को ईरोड का पंचांग

रविवार, 2 सितंबर 2029, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 2 सितंबर 2029 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (00:17, 3 सित॰ तक), नक्षत्र मृगशिरा (04:48, 3 सित॰ तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 18:28 पर है। राहुकाल 16:55 से 18:28 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 18:28
रात 06:09 तक
तिथि
नवमी, 00:17 तक
दशमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 04:48 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 सितंबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण नवमी 00:17, 3 सित॰ तक
कृष्ण दशमी 00:51, 4 सित॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 04:48, 3 सित॰ तक
आर्द्रा 05:52, 4 सित॰ तक
योग
वज्रअशुभ 23:12 तक
सिद्धि 22:40, 3 सित॰ तक
करण
तैतिल 11:42 तक
गर 00:17, 3 सित॰ तक
वणिज 12:40, 3 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 15:59 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
18:28
चंद्रोदय
00:13
चंद्रास्त
13:21
दिनमान
12h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:35 – 05:22
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
16:55 – 18:28
यमगंड
12:18 – 13:51
गुलिक काल
15:23 – 16:55

2 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:09 – 07:41टालें
चर07:41 – 09:13सामान्य
लाभ09:13 – 10:46शुभ
अमृत10:46 – 12:18शुभ
काल12:18 – 13:51टालें
शुभ13:51 – 15:23शुभ
रोग15:23 – 16:55टालें
उद्वेग16:55 – 18:28टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:28 – 19:55शुभ
अमृत19:55 – 21:23शुभ
चर21:23 – 22:51सामान्य
रोग22:51 – 00:18टालें
काल00:18 – 01:46टालें
लाभ01:46 – 03:13शुभ
उद्वेग03:13 – 04:41टालें
शुभ04:41 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0907:10दिन
शुक्र07:1008:12दिन
बुध08:1209:13दिन
चंद्र09:1310:15दिन
शनि10:1511:17दिन
गुरु11:1712:18दिन
मंगल12:1813:20दिन
सूर्य13:2014:21दिन
शुक्र14:2115:23दिन
बुध15:2316:25दिन
चंद्र16:2517:26दिन
शनि17:2618:28दिन
गुरु18:2819:26रात
मंगल19:2620:25रात
सूर्य20:2521:23रात
शुक्र21:2322:21रात
बुध22:2123:20रात
चंद्र23:2000:18रात
शनि00:1801:17रात
गुरु01:1702:15रात
मंगल02:1503:13रात
सूर्य03:1304:12रात
शुक्र04:1205:10रात
बुध05:1006:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 सित॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
26 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2715° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।