20 नवंबर 2029 को ईरोड का पंचांग

मंगलवार, 20 नवंबर 2029, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 20 नवंबर 2029 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (07:02 तक), नक्षत्र भरणी (17:01 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:17 पर और सूर्यास्त 17:51 पर है। राहुकाल 14:58 से 16:25 तक है।

दिन और रात
दिन 06:17 – 17:51
रात 06:17 तक
तिथि
पूर्णिमा
नक्षत्र
भरणी, 17:01 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 नवंबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 07:02 तक
पूर्णिमा 09:33, 21 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 17:01 तक
कृत्तिका 19:55, 21 नव॰ तक
योग
वरीयान 15:30 तक
परिघअशुभ 16:18, 21 नव॰ तक
करण
वणिज 07:02 तक
विष्टि (भद्रा) 20:18 तक
बव 09:33, 21 नव॰ तक
चंद्र राशि
मेष 23:46 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:17
सूर्यास्त
17:51
चंद्रोदय
17:13
चंद्रास्त
05:24
दिनमान
11h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:27
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
14:58 – 16:25
यमगंड
09:11 – 10:37
गुलिक काल
12:04 – 13:31

20 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:17 – 07:44टालें
उद्वेग07:44 – 09:11टालें
चर09:11 – 10:37सामान्य
लाभ10:37 – 12:04शुभ
अमृत12:04 – 13:31शुभ
काल13:31 – 14:58टालें
शुभ14:58 – 16:25शुभ
रोग16:25 – 17:51टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:51 – 19:25टालें
लाभ19:25 – 20:58शुभ
उद्वेग20:58 – 22:31टालें
शुभ22:31 – 00:04शुभ
अमृत00:04 – 01:38शुभ
चर01:38 – 03:11सामान्य
रोग03:11 – 04:44टालें
काल04:44 – 06:17टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:1707:15दिन
सूर्य07:1508:13दिन
शुक्र08:1309:11दिन
बुध09:1110:08दिन
चंद्र10:0811:06दिन
शनि11:0612:04दिन
गुरु12:0413:02दिन
मंगल13:0214:00दिन
सूर्य14:0014:58दिन
शुक्र14:5815:56दिन
बुध15:5616:53दिन
चंद्र16:5317:51दिन
शनि17:5118:53रात
गुरु18:5319:56रात
मंगल19:5620:58रात
सूर्य20:5822:00रात
शुक्र22:0023:02रात
बुध23:0200:04रात
चंद्र00:0401:07रात
शनि01:0702:09रात
गुरु02:0903:11रात
मंगल03:1104:13रात
सूर्य04:1305:15रात
शुक्र05:1506:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2745° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।