23 सितंबर 2029 को गोरखपुर का पंचांग

रविवार, 23 सितंबर 2029, गोरखपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 23 सितंबर 2029 को गोरखपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (23:59 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (19:51 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 17:51 पर है। राहुकाल 16:21 से 17:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 17:51
रात 05:45 तक
तिथि
प्रतिपदा, 23:59 तक
द्वितीया
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 19:51 तक
रेवती
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 सितंबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 23:59 तक
कृष्ण द्वितीया 02:16, 25 सित॰ तक
नक्षत्र
रेवती 22:37, 24 सित॰ तक
योग
वृद्धि 02:12, 24 सित॰ तक
ध्रुव 02:59, 25 सित॰ तक
करण
बालव 10:57 तक
कौलव 23:59 तक
तैतिल 13:05, 24 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
17:51
चंद्रोदय
17:58
चंद्रास्त
06:06
दिनमान
12h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
16:21 – 17:51
यमगंड
11:48 – 13:19
गुलिक काल
14:50 – 16:21

23 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:45 – 07:16टालें
चर07:16 – 08:47सामान्य
लाभ08:47 – 10:17शुभ
अमृत10:17 – 11:48शुभ
काल11:48 – 13:19टालें
शुभ13:19 – 14:50शुभ
रोग14:50 – 16:21टालें
उद्वेग16:21 – 17:51टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:51 – 19:21शुभ
अमृत19:21 – 20:50शुभ
चर20:50 – 22:19सामान्य
रोग22:19 – 23:48टालें
काल23:48 – 01:18टालें
लाभ01:18 – 02:47शुभ
उद्वेग02:47 – 04:16टालें
शुभ04:16 – 05:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4506:45दिन
शुक्र06:4507:46दिन
बुध07:4608:47दिन
चंद्र08:4709:47दिन
शनि09:4710:48दिन
गुरु10:4811:48दिन
मंगल11:4812:49दिन
सूर्य12:4913:49दिन
शुक्र13:4914:50दिन
बुध14:5015:50दिन
चंद्र15:5016:51दिन
शनि16:5117:51दिन
गुरु17:5118:51रात
मंगल18:5119:50रात
सूर्य19:5020:50रात
शुक्र20:5021:49रात
बुध21:4922:49रात
चंद्र22:4923:48रात
शनि23:4800:48रात
गुरु00:4801:47रात
मंगल01:4702:47रात
सूर्य02:4703:46रात
शुक्र03:4604:46रात
बुध04:4605:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां गोरखपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2723° (लाहिड़ी)। समय गोरखपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।