9 मार्च 2025 को हावड़ा का पंचांग

रविवार, 9 मार्च 2025, हावड़ा, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 9 मार्च 2025 को हावड़ा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (07:45 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (23:55 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 17:43 पर है। राहुकाल 16:14 से 17:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 17:43
रात 05:50 तक
तिथि
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 23:55 तक
पुष्य
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 मार्च 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल दशमी 07:45 तक
शुक्ल एकादशी 07:45, 10 मार्च तक
नक्षत्र
पुष्य 00:51, 11 मार्च तक
योग
सौभाग्य 14:58 तक
शोभन 13:56, 10 मार्च तक
करण
गर 07:45 तक
वणिज 19:41 तक
विष्टि (भद्रा) 07:45, 10 मार्च तक
चंद्र राशि
मिथुन 17:45 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
17:43
चंद्रोदय
13:18
चंद्रास्त
02:30
दिनमान
11h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:23 – 12:11

अशुभ समय

राहुकाल
16:14 – 17:43
यमगंड
11:47 – 13:16
गुलिक काल
14:45 – 16:14

9 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:51 – 07:20टालें
चर07:20 – 08:49सामान्य
लाभ08:49 – 10:18शुभ
अमृत10:18 – 11:47शुभ
काल11:47 – 13:16टालें
शुभ13:16 – 14:45शुभ
रोग14:45 – 16:14टालें
उद्वेग16:14 – 17:43टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:43 – 19:14शुभ
अमृत19:14 – 20:45शुभ
चर20:45 – 22:16सामान्य
रोग22:16 – 23:47टालें
काल23:47 – 01:17टालें
लाभ01:17 – 02:48शुभ
उद्वेग02:48 – 04:19टालें
शुभ04:19 – 05:50शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5106:50दिन
शुक्र06:5007:50दिन
बुध07:5008:49दिन
चंद्र08:4909:48दिन
शनि09:4810:48दिन
गुरु10:4811:47दिन
मंगल11:4712:46दिन
सूर्य12:4613:46दिन
शुक्र13:4614:45दिन
बुध14:4515:45दिन
चंद्र15:4516:44दिन
शनि16:4417:43दिन
गुरु17:4318:44रात
मंगल18:4419:44रात
सूर्य19:4420:45रात
शुक्र20:4521:46रात
बुध21:4622:46रात
चंद्र22:4623:47रात
शनि23:4700:47रात
गुरु00:4701:48रात
मंगल01:4802:48रात
सूर्य02:4803:49रात
शुक्र03:4904:49रात
बुध04:4905:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां हावड़ा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2089° (लाहिड़ी)। समय हावड़ा (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।