26 जनवरी 2026 को हावड़ा का पंचांग

सोमवार, 26 जनवरी 2026, हावड़ा, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 26 जनवरी 2026 को हावड़ा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (21:18 तक), नक्षत्र अश्विनी (12:33 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:18 पर और सूर्यास्त 17:21 पर है। राहुकाल 07:40 से 09:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:18 – 17:21
रात 06:17 तक
तिथि
अष्टमी, 21:18 तक
नवमी
नक्षत्र
अश्विनी, 12:33 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जनवरी 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 21:18 तक
शुक्ल नवमी 19:05, 27 जन॰ तक
नक्षत्र
भरणी 11:09, 27 जन॰ तक
योग
साध्य 09:11 तक
शुभ 06:19, 27 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:17 तक
बव 21:18 तक
बालव 08:14, 27 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:18
सूर्यास्त
17:21
चंद्रोदय
10:55
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:34 – 05:26
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:11

अशुभ समय

राहुकाल
07:40 – 09:03
यमगंड
10:26 – 11:49
गुलिक काल
13:12 – 14:35

26 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:18 – 07:40शुभ
काल07:40 – 09:03टालें
शुभ09:03 – 10:26शुभ
रोग10:26 – 11:49टालें
उद्वेग11:49 – 13:12टालें
चर13:12 – 14:35सामान्य
लाभ14:35 – 15:58शुभ
अमृत15:58 – 17:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:21 – 18:58सामान्य
रोग18:58 – 20:35टालें
काल20:35 – 22:12टालें
लाभ22:12 – 23:49शुभ
उद्वेग23:49 – 01:26टालें
शुभ01:26 – 03:03शुभ
अमृत03:03 – 04:40शुभ
चर04:40 – 06:17सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1807:13दिन
शनि07:1308:08दिन
गुरु08:0809:03दिन
मंगल09:0309:59दिन
सूर्य09:5910:54दिन
शुक्र10:5411:49दिन
बुध11:4912:44दिन
चंद्र12:4413:40दिन
शनि13:4014:35दिन
गुरु14:3515:30दिन
मंगल15:3016:25दिन
सूर्य16:2517:21दिन
शुक्र17:2118:25रात
बुध18:2519:30रात
चंद्र19:3020:35रात
शनि20:3521:39रात
गुरु21:3922:44रात
मंगल22:4423:49रात
सूर्य23:4900:54रात
शुक्र00:5401:58रात
बुध01:5803:03रात
चंद्र03:0304:08रात
शनि04:0805:13रात
गुरु05:1306:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां हावड़ा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2212° (लाहिड़ी)। समय हावड़ा (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।