13 नवंबर 2026 को इम्फाल का पंचांग

शुक्रवार, 13 नवंबर 2026, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (20:43 तक), नक्षत्र मूल (17:17 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:28 पर और सूर्यास्त 16:27 पर है। राहुकाल 09:35 से 10:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:28 – 16:27
रात 05:29 तक
तिथि
चतुर्थी, 20:43 तक
पंचमी
नक्षत्र
मूल, 17:17 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 नवंबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 20:43 तक
शुक्ल पंचमी 23:24, 14 नव॰ तक
नक्षत्र
मूल 17:17 तक
पूर्वाषाढ़ा 20:24, 14 नव॰ तक
योग
धृति 05:23, 14 नव॰ तक
शूलअशुभ 06:22, 15 नव॰ तक
करण
वणिज 07:24 तक
विष्टि (भद्रा) 20:43 तक
बव 10:03, 14 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:28
सूर्यास्त
16:27
चंद्रोदय
08:56
चंद्रास्त
19:27
दिनमान
10h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:44 – 04:36
अभिजीत मुहूर्त
10:36 – 11:20

अशुभ समय

राहुकाल
09:35 – 10:58
यमगंड
13:43 – 15:05
गुलिक काल
06:51 – 08:13

13 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:28 – 06:51सामान्य
लाभ06:51 – 08:13शुभ
अमृत08:13 – 09:35शुभ
काल09:35 – 10:58टालें
शुभ10:58 – 12:20शुभ
रोग12:20 – 13:43टालें
उद्वेग13:43 – 15:05टालें
चर15:05 – 16:27सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:27 – 18:05टालें
काल18:05 – 19:43टालें
लाभ19:43 – 21:20शुभ
उद्वेग21:20 – 22:58टालें
शुभ22:58 – 00:36शुभ
अमृत00:36 – 02:14शुभ
चर02:14 – 03:51सामान्य
रोग03:51 – 05:29टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2806:23दिन
बुध06:2307:18दिन
चंद्र07:1808:13दिन
शनि08:1309:08दिन
गुरु09:0810:03दिन
मंगल10:0310:58दिन
सूर्य10:5811:53दिन
शुक्र11:5312:48दिन
बुध12:4813:43दिन
चंद्र13:4314:37दिन
शनि14:3715:32दिन
गुरु15:3216:27दिन
मंगल16:2717:32रात
सूर्य17:3218:38रात
शुक्र18:3819:43रात
बुध19:4320:48रात
चंद्र20:4821:53रात
शनि21:5322:58रात
गुरु22:5800:03रात
मंगल00:0301:08रात
सूर्य01:0802:14रात
शुक्र02:1403:19रात
बुध03:1904:24रात
चंद्र04:2405:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
28 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2324° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।