27 फ़रवरी 2028 को इम्फाल का पंचांग

रविवार, 27 फ़रवरी 2028, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 27 फ़रवरी 2028 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (21:00 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (11:01 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 17:15 पर है। राहुकाल 15:48 से 17:15 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 17:15
रात 05:38 तक
तिथि
द्वितीया, 21:00 तक
तृतीया
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 11:01 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 21:00 तक
शुक्ल तृतीया 23:02, 28 फ़र॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 13:39, 28 फ़र॰ तक
योग
साध्य 22:19 तक
शुभ 22:48, 28 फ़र॰ तक
करण
बालव 07:52 तक
कौलव 21:00 तक
तैतिल 10:03, 28 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
17:15
चंद्रोदय
06:21
चंद्रास्त
18:53
दिनमान
11h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
11:04 – 11:50

अशुभ समय

राहुकाल
15:48 – 17:15
यमगंड
11:27 – 12:54
गुलिक काल
14:21 – 15:48

27 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:39 – 07:06टालें
चर07:06 – 08:33सामान्य
लाभ08:33 – 10:00शुभ
अमृत10:00 – 11:27शुभ
काल11:27 – 12:54टालें
शुभ12:54 – 14:21शुभ
रोग14:21 – 15:48टालें
उद्वेग15:48 – 17:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:15 – 18:47शुभ
अमृत18:47 – 20:20शुभ
चर20:20 – 21:53सामान्य
रोग21:53 – 23:26टालें
काल23:26 – 00:59टालें
लाभ00:59 – 02:32शुभ
उद्वेग02:32 – 04:05टालें
शुभ04:05 – 05:38शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3906:37दिन
शुक्र06:3707:35दिन
बुध07:3508:33दिन
चंद्र08:3309:31दिन
शनि09:3110:29दिन
गुरु10:2911:27दिन
मंगल11:2712:25दिन
सूर्य12:2513:23दिन
शुक्र13:2314:21दिन
बुध14:2115:19दिन
चंद्र15:1916:17दिन
शनि16:1717:15दिन
गुरु17:1518:16रात
मंगल18:1619:18रात
सूर्य19:1820:20रात
शुक्र20:2021:22रात
बुध21:2222:24रात
चंद्र22:2423:26रात
शनि23:2600:28रात
गुरु00:2801:30रात
मंगल01:3002:32रात
सूर्य02:3203:34रात
शुक्र03:3404:36रात
बुध04:3605:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2504° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।