15 अप्रैल 2028 को इम्फाल का पंचांग

शनिवार, 15 अप्रैल 2028, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 15 अप्रैल 2028 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (07:48 तक), नक्षत्र मूल (07:41 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 04:52 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है। राहुकाल 08:03 से 09:38 तक है।

दिन और रात
दिन 04:52 – 17:36
रात 04:51 तक
तिथि
षष्ठी, 07:48 तक
सप्तमी
नक्षत्र
मूल, 07:41 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अप्रैल 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 07:48 तक
कृष्ण सप्तमी 09:10, 16 अप्रैल तक
नक्षत्र
मूल 07:41 तक
पूर्वाषाढ़ा 09:39, 16 अप्रैल तक
योग
परिघअशुभ 05:13 तक
शिव 05:11, 16 अप्रैल तक
करण
वणिज 07:48 तक
विष्टि (भद्रा) 20:23 तक
बव 09:10, 16 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:52
सूर्यास्त
17:36
चंद्रोदय
23:32
चंद्रास्त
09:26
दिनमान
12h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:21 – 04:07
अभिजीत मुहूर्त
10:48 – 11:39

अशुभ समय

राहुकाल
08:03 – 09:38
यमगंड
12:49 – 14:25
गुलिक काल
04:52 – 06:27

15 अप्रैल 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल04:52 – 06:27टालें
शुभ06:27 – 08:03शुभ
रोग08:03 – 09:38टालें
उद्वेग09:38 – 11:14टालें
चर11:14 – 12:49सामान्य
लाभ12:49 – 14:25शुभ
अमृत14:25 – 16:01शुभ
काल16:01 – 17:36टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:36 – 19:00शुभ
उद्वेग19:00 – 20:25टालें
शुभ20:25 – 21:49शुभ
अमृत21:49 – 23:13शुभ
चर23:13 – 00:38सामान्य
रोग00:38 – 02:02टालें
काल02:02 – 03:26टालें
लाभ03:26 – 04:51शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि04:5205:55दिन
गुरु05:5506:59दिन
मंगल06:5908:03दिन
सूर्य08:0309:06दिन
शुक्र09:0610:10दिन
बुध10:1011:14दिन
चंद्र11:1412:18दिन
शनि12:1813:21दिन
गुरु13:2114:25दिन
मंगल14:2515:29दिन
सूर्य15:2916:32दिन
शुक्र16:3217:36दिन
बुध17:3618:32रात
चंद्र18:3219:29रात
शनि19:2920:25रात
गुरु20:2521:21रात
मंगल21:2122:17रात
सूर्य22:1723:13रात
शुक्र23:1300:10रात
बुध00:1001:06रात
चंद्र01:0602:02रात
शनि02:0202:58रात
गुरु02:5803:54रात
मंगल03:5404:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अप्रैल 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 अप्रैल 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 अप्रैल 2028वैशाख अमावस्याअमावस्या
28 अप्रैल 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 मई 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 मई 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 मई 2028वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
12 मई 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मई 2028वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2522° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।